सद्गति

 ओम् सहनाववतु सहनौ भुनक्तु सहवीर्य करवावहै ।

 तेजस्विनावधीतमस्तु माविद्विषावहै ।।


 रक्षण कर जगदीश हमारा तू ही पालनहार । 

गुरु - शिष्य हम द्वेष रहित हों पढ़ें वीरता धार ।। 


असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्माऽमृतं गमय ।

 

हों असत् से दूर भगवन् , सत्य का वरदान् दो ।

 दूर कर द्रूत तिमिर भगवन् , दिव्य ज्योति वितान दो ॥

 मृत्यु बंधन से छुड़ा , अमरत्व हे भगवान् दो ।

 प्रकृति पाशों से छुड़ा , आनन्द मधु का पान दो ॥




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