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lampi virus से अपनी गाय को बचाने के लिए निम्न प्रकार की सावधानियां रखें आइए जानते हैं कैसे...

lampi virus   आज पूरे भारतवर्ष में हमारी गाय माता पर हावी है जिसकी वजह से हमारी गायों को अत्यधिक नुकसान हो रहा है और हमारे किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं लेकिन आज हम जानेंगे लंबी वायरस से अपने गायों को बचाने के लिए कुछ बेहतरीन सावधानियां जिनसे कुछ चांस कम हो जाएंगे lampi virus होने के आइए जानते हैं -- साफ सफाई का रखें ध्यान - अगर गायों को रखने वाला जगह साफ सुथरा नहीं है तो वहां से गायों को इन्फक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए कोशिश करेगी गायों को रखने वाले स्थान यानी कि तबेला साफ सुथरा रखें और अगर वहां पर कीचड़ हमेशा बना रहता है तो उस कीचड़ में मिट्टी का तेल अवश्य डालें या उसकी जड़ में मिट्टी के तेल का छिड़काव करें इससे कीचड़ में किसी भी तरह की बैक्टीरिया और वायरस नहीं बनेंगे ! खानपान हरियाली - समय के साथ हर जियो अपनी धीरे-धीरे पोलूशन बड़ी दुनिया में अपनी पाचन क्रिया को होता जा रहा है खेतों में अच्छी प्रकार हरियाली लाने के लिए यूरिया डाई कार्बोनेटेड क्या दिखा दो का उपयोग किया जा रहा है जो हमारे सेहत के लिए कहीं न कहीं अच्छा नहीं है यहां हम बात उन किसानों की कर रहे हैं जो कई लोग बा

पर्सनल लोन के लिए अप्लाई कैसे करें

 क्या आप भी पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं और आप आसानी से लोन प्राप्त करना चाहते हैं तो बिल्कुल आप सही जगह है यहां हम बात करेंगे पर्सनल लोन से जुड़ी हर एक टॉपिक पर जिससे आपको मिलेंगे और भी बेहतर रास्ते ! सेबी के नियमों के अनुसार कोई भी बैंक हर प्रकार के लोन देने में सक्षम है तथा सेबी द्वारा लगाए गए लोन धनराशि पर एक निर्धारित ब्याज भी है जिसे इंटरेस्ट लोन इंटरेस्ट के नाम से जानते हैं तो विभिन्न प्रकार की जरूरी डाक्यूमेंट्स आपके पास अवश्य होने चाहिए जिनमें से कुछ है आधार कार्ड पैन कार्ड बैंक पासबुक और लास्ट 3 से 6 महीने का ट्रांजैक्शन जो आपने बैंक में द्वारा किया है सबसे पहले अपने नजदीकी किसी भी बैंक और बेहतर यह रहेगा कि आपका बैंक के अकाउंट जिस ब्रांच में है वही जाकर अपने ब्रांच बैंक से ही लोन अप्लाई करें लोन अप्लाई कर सकते हैं अगर आप किसी और बैंक से लेना चाहते हैं तो आसानी से आप किसी भी बैंक में लोन अप्लाई कर सकते हैं ! बैंक का हमेशा यह चाहती है कि वह अधिक से अधिक कस्टमर को लोन दे सके बस इतने सारे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन इसलिए होते हैं ताकि आप लोन राशि को चुकाने में सक्षम है या न

अपने जन्माष्टमी समारोह को थोड़ा खास बनाएं

 जन्माष्टमी का उत्सव भगवान कृष्ण को उनकी संपूर्णता में आमंत्रित करने के लिए समर्पित है। घटना की प्रशंसा करने के हर किसी के अपने विशेष तरीके होते हैं, वैसे भी, कुछ समारोह ऐसे होते हैं जो सामान्य होते हैं। निम्नलिखित कुछ ऐसे रिवाज़ हैं जिन्हें आप जश्न मनाने और उत्सव में कुछ और हिस्सा लेने के लिए कर सकते हैं।  दिन की छुट्टी पर उपवास शुरू करें -  उपवास जन्माष्टमी अवसर के सबसे मौलिक और सर्वव्यापी टुकड़ों में से एक है। आप आम तौर पर उत्सव की अधिक प्रशंसा करने के लिए घटना पर एक त्वरित नोटिस कर सकते हैं।  गुच्छा प्रतिबिंब धुनों और सेरेनेड्स में भाग लें -    गायन कीर्तन, या प्रतिबद्धता, महिमा, या प्रशंसा की धुन, जन्माष्टमी उत्सव का एक और महत्वपूर्ण घटक है। इस तथ्य के अलावा कि यह मूर्खता और प्रतिबिंब है, यह वास्तव में एक उत्सव के एक टुकड़े की तरह महसूस करने का कारण बनता है। इसी तरह, कीर्तन व्यक्तियों को एकजुट करते हैं।  अभयारण्य के लिए पुष्पांजलि और विभिन्न डिजाइनों की योजना बनाएं -    इस अवसर के सख्त और खुश घटकों में भाग लेने के लिए अपने घर या अपने पड़ोसी में अभयारण्य को सजाने में सहायता कर

वजन घटाने के लिए प्रोटीन से भरपूर लंच रेसिपी! अंडे की भुर्जी और पनीर भुर्जी के अलावा आप टोफू भुर्जी को जरूर ट्राई कर सकते हैं।

 फिट रहने और स्वस्थ जीवन शैली के लिए, अपने आहार में बहुत सारे प्रोटीन को शामिल करना महत्वपूर्ण है। प्रोटीन युक्त भोजन आपको लंबे समय तक भरा हुआ रहने में मदद करता है और इस प्रकार, आपके वजन घटाने की यात्रा में मदद करता है। जबकि लोग कहते हैं कि भारतीय व्यंजन प्रोटीन से भरपूर नहीं हैं, हम अलग होने की भीख माँगते हैं। आप वास्तव में दोपहर के भोजन के कई विकल्प ले सकते हैं जो स्वस्थ, स्वादिष्ट और निश्चित रूप से प्रोटीन से भरपूर होते हैं।  अंकुरित चीला ---  अंडे की भुर्जी और पनीर भुर्जी के अलावा आप टोफू भुर्जी को जरूर ट्राई कर सकते हैं। टोफू को क्रम्बल करें और कुछ प्याज, टमाटर, गाजर, हरी मिर्च और शिमला मिर्च को भूनें। फिर टोफू, नमक डालें और भुर्जी का आनंद लें।  स्प्राउट्स चीला---  अगर आप स्प्राउट पर्सन हैं लेकिन स्प्राउट्स को अलग तरह से खाना चाहते हैं तो यह रेसिपी आपके लिए है। बस 1 कप हरी मूंग स्प्राउट्स, 1 हरी मिर्च और 1 लहसुन की कली डालें और उचित मात्रा में पानी का उपयोग करके इसे ब्लेंड करें। इसे अपनी पसंद की सब्जियों के साथ मिलाएं और चीला बना लें।  पनीर के साथ ओट्स डोसा ----  अगर आप स्प

आंखों की थकान के बारे में सब! आंखों की उचित देखभाल और इसके कारण की पहचान करके आंखों के तनाव को आसानी से ठीक किया जा सकता है

आंखों की थकान आजकल लगभग हर आयु वर्ग की एक बहुत ही आम समस्या है। यह अतिरिक्त स्क्रीन एक्सपोजर का आने वाला परिणाम हो सकता है। आंखों की थकान केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि एक लक्षण है जिसके माध्यम से आपका शरीर आपको बता रहा है कि कोई न कोई गतिविधि जो आप लंबे समय से बिना रुके कर रहे हैं, वह आप पर भारी पड़ रही है।  आंखों की थकान के कारण --  आंखों का तनाव आमतौर पर किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं देता है लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह लंबे समय में बीमारी में बदल सकता है। आंखों में खिंचाव के कुछ सबसे सामान्य कारणों में शामिल है ,  मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी का अधिक उपयोग। पुस्तकों के पढ़ने का विस्तारित समय। अपर्याप्त या अत्यधिक रोशनी के संपर्क में। लंबे समय तक ड्राइविंग। अनुचित नींद ओवरस्ट्रेस गलत संख्या में चश्मा पहने हुए। कमजोर दृष्टि लेखन या सिलाई की एक विस्तारित अवधि  आंखों की थकान के लक्षण --  जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को करते समय अपनी आंखों पर दबाव का सामना कर रहा होता है तो इससे आंखों में थकान हो जाती है। रोगी इसे सूजी हुई आँखें, सूखापन, धुंधली दृष्टि, पानी आँखें क

पीठ दर्द से थक गए हैं? इन अभ्यासों को आजमाएं ये अभ्यास लोगों को पीठ के निचले हिस्से की परेशानी को कम करने और प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं

कार्य क्षेत्र के काम की विस्तारित अवधि हमारी मांसपेशियों को ठोस बना सकती है, खासकर हमारी पीठ। इससे दौरे पड़ सकते हैं और लगातार दर्द हो सकता है। बैक-फोर्टिफाइंग रेजिमेंट को खत्म करने के बाद, पीठ के निचले हिस्से को मजबूत करने और विस्तारित करने वाला व्यायाम चोट और मांसपेशियों की पीड़ा को रोकने में मदद कर सकता है। यह कम पीठ के संकट को कम करने और उसकी देखरेख करने वाले व्यक्तियों की मदद कर सकता है। वे अतिरिक्त रूप से अनुकूलन क्षमता और आंदोलन के दायरे को बढ़ाते हैं। ग्लूट स्पैन ग्लूटस मैक्सिमस, सबसे व्यापक ग्लूटियल मांसपेशी जो पीछे के छोर को आकार देती है, ग्लूट स्पैन द्वारा काम किया जाता है। उस बिंदु पर जब कोई व्यक्ति अपने कूल्हों को उठाता है, उदाहरण के लिए, एक स्क्वाट के बाद खड़ा होना, यह पेशी सिकुड़ जाती है।  इसके अलावा, यह स्नैचिंग का समर्थन करता है, जो तब होता है जब पैर शरीर से ऊपर उठता है, और बाहरी मोड़, जब घुटने और कूल्हे शरीर से खुलते हैं। पक्षी-कुत्ते पक्षी-कुत्ते ग्लूटियल मांसपेशियों को सक्रिय करते हैं। इसके अलावा, यह बैक एक्सटेंसर मांसपेशियों को काम करता है, जो रीढ़ के पिछले हिस्से

आपके स्किनकेयर रूटीन में शामिल करने के लिए प्राकृतिक चेहरे के तेल! चेहरे के तेल चेहरे पर जलन और लाली को कम करने में मदद करते हैं

 त्वचा की गुणवत्ता और सतह को और विकसित करने के लिए चेहरे के तेल का उपयोग एक गहरी जड़ें सामान्य विधि है। सबसे अच्छी बात यह है कि वे त्वचा को पोषित और ठोस रखने में मदद करते हैं। वे त्वचा के टूटने, एकतरफा रंग को खत्म करने और कोमल नाजुक त्वचा देने के लिए आदर्श हैं। उनके अतिरिक्त के बावजूद, वे आपकी त्वचा को चिकना और परेशान नहीं छोड़ेंगे। चेहरे के तेल चेहरे की परेशानी और लालिमा को कम करने में मदद करते हैं। जलन और अन्य लाभकारी फिक्सिंग को कम करने के लिए त्वचा के तेल सेल सुदृढीकरण के साथ उन्नत होते हैं।  तो यहाँ आप 5 सर्वश्रेष्ठ त्वचा तेलों के साथ जा रहे हैं जिन्हें आप अपने नियमित स्किनकेयर शेड्यूल में शामिल कर सकते हैं। आर्गन का तेल: एक साधारण लोशन के रूप में उपयोग करने के लिए आर्गन तेल पर्याप्त रूप से हल्का होता है। यह विटामिन ई, कैंसर की रोकथाम एजेंटों और महत्वपूर्ण असंतृप्त वसा से भरा हुआ है। यह तेल शुष्कता को कम करने और तेल निर्माण में मदद करता है जिससे त्वचा की सूजन कम होती है। आर्गन ऑयल का उपयोग करने से डर्मेटाइटिस जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है। गुलाब के ब

इस मानसून, अपने बालों की देखभाल करें तेल को नियमित रूप से अपने बालों की देखभाल की दिनचर्या का हिस्सा बनाने से आपके बालों को पोषण मिलेगा

 ग्रीष्म ऋतु की भीषण तीव्रता से पार पाने के मद्देनजर हम सब इस बात की व्यवस्था कर रहे हैं कि तूफान का मौसम अमिलित आनंद हो। बारिश और ठंडी हवा में पड़ोस के ढलान वाले स्टेशन पर जाने के लिए यह एक गर्म मुठभेड़ है। तूफानों के दौरान, हम आमतौर पर सप्ताह के अपने सुस्त अंत में अपना ध्यान रखने का पूर्वाभ्यास करके और पढ़ने या खाना पकाने जैसे व्यायामों का आनंद लेते हुए भाग लेते हैं। हम अपने बालों को संभालने की उपेक्षा करते हैं और समय-समय पर इसे जरूरतों की सूची में डाल देते हैं। वैसे भी, बारिश के मौसम में, हमारे बाल कुछ अधिक ध्यान और देखभाल की मांग करते हैं। ऐसा करने के कुछ तरीके निम्नलिखित हैं- एलोवेरा और ग्रीन टी के साथ बालों में तेल लगाएं - तेल लगाने को अपने बालों की देखभाल की दिनचर्या का सामान्य हिस्सा बना लेने से आपके बाल बरकरार रहेंगे। बालों को जड़ों से मजबूत करने, फ्रिज कम करने और बालों को टूटने से बचाने के लिए हफ्ते में दो बार शैंपू करने से पहले बालों में तेल लगाएं। कम कठोर पानी का प्रयोग करें - बारिश के मौसम में पानी की गुणवत्ता में गिरावट आती है क्योंकि कठोर पानी में खनिजों का बड़ा समूह होत

कीड़े के काटने पर आयुर्वेद में समाधान

 यदि बरं, मधुमक्खी या ऐसा ही कोई जहरीला कीड़ा काट ले और डंक भीतर ही रह जाये, तो माचिस की तीली का मसाला खुरचकर पानी में घोल ले। घोल गाढ़ा होना चाहिए। अब इस घोल को उस जगह पर भर दें, जहाँ कीड़े ने काटा हो। इससे लाली, दर्द, सूजन वगैरह कुछ नहीं होगा और घाव जल्दी भरेगा।

बिच्छू के काटने पर आयुर्वेद में समाधान

 फिटकरी को गर्म करें, जब वह पिघलने लगे तो फौरन उस जगह पर चिपका दें, जहाँ बिच्छू ने काटा हो, बिच्छू का पूरा जहर उस फिटकरी में आ जायेगा और बाद में वह चिपकी हुई फिटकरी अपने आप निकल जायेगी।

सांप के काटने पर आयुर्वेद उपचार

साँप के काटने पर पीपल के ताजे डण्ठल को कान में लगाकर मजबूती से पकड़े रहने पर साँप का विष उतर जाता है। इस दौरान साँप द्वारा दंशित व्यक्ति को काफी कष्ट होता है, इसलिये उसके सिर को 2-3 व्यक्तियों को मजबूती से पकड़े रहना चाहिए। जो शख्स यह चाहे कि साँप का विष न चढ़े, उसे हर रोज सवेरे कड़वे नीम के पत्ते, चबाने की आदत डालनी चाहिये। जो आदमी 'बिना चूके, रोज नीम के पत्ते चबाता है, उस पर सर्प विष असर नहीं करता।

मकड़ी कि काटने पर आयुर्वेद में उपचार

 सफेद जीरा और सौंठ को पानी के साथ पीसकर लेप करने से मकड़ी के विष का प्रभाव नष्ट हो जाता है। जहाँ मकड़ी लगने से फफोले उठे हों, वहाँ लेप करना चाहिए।

(पीलिया) पीलिया की समस्या का आयुर्वेद में इलाज

 मूली के पत्तों का रस 100 ग्राम ले और 20 ग्राम शक्कर में मिलाकर सुबह के वक्त 15-20 दिन पीयें। पीलिया में फायदा होगा, दवा सेवन के दौरान खटाई से परहेज रखें। चने के बराबर फिटकरी (एलम) आग पर सेंक कर फुला लें और बारीक पीस लें। एक पका हुआ केला बीच में से आधा काट कर दो चीर कर ले और इस पर फिटकरी बुरककर दो भाग मिला लें। इसे प्रातः खाली पेट खा लें। सात दिन तक इस प्रकार एक केला रोज खाने से पीलिया ठीक हो जाता है।

हिचकी आने पर करें यह आयुर्वेदिक उपचार

 सोंठ को पानी में घिसकर सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है। अदरक की एक गांठ लेकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और चूसें इससे हिचकी बंद हो जाती है। जलते कोयले पर कपूर की टिकिया डालकर सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है।

कफ विकार संबंधित समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज

कफ विकार संबंधित समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज...  कभी-कभी कोई गरम पेय अथवा गरम औषधि के सेवन से कफ सूख कर छाती पर जम जाता है। सूखा हुआ कब बड़ी कठिन का से निकलता है। छाती पर कफ के कारण 'घर्र-घर्र शब्द होता है। इसमें  निम्न उपायों का प्रयोग करें- अदरक को छील कर, मटर के बराबर उसका टुकड़ा मुख में रखकर चूसने से कफ सुगमता से निकल जाता है। मुलहठी और सूखा आंवला अलग-अलग बारिक करके पीसें और छान लें तथा मिलाकर रखें। इनमें से एक चम्मच उन दिन में दो बार खाली पेट प्रातः पानी से लेने से फेफड़ों पर जमा हुआ कफ साफ हो जाता है।

खांसी तथा फेफड़े के रोग का आयुर्वेद में समाधान

खांसी तथा फेफड़े के रोग का आयुर्वेद में समाधान...  छः-सात काली मिर्च पीसकर शहद में घोलकर चाटने से खाँसी में आराम होता है। यह प्रयोग रात में करें। इसके सेवन के बाद पानी न पियें।  दो सौ ग्राम प्याज, दो ग्राम अदरक, चार-पाँच नग बड़ी पीपल, दस ग्राम काली मिर्च और ढाई सौ ग्राम मिश्री लेकर इन सबके छोटे-छोटे टुकड़े कर एक साथ मिला दें। इसके बाद इसमें पूरा सराबोर होने लायक घी मिलाकर आग पर खूब गर्म करें। जब अच्छी तरह पक जाए, तो दिन में तीन बार दो से चार चम्मच तक लें, लेकिन हर बार गर्म करके ही खाएँ। किसी भी प्रकार की खाँसी में दो-तीन दिन में आराम हो जाएगा।   सेंधा नमक की एक डली आग में तपायें, फिर चिमटे से पकड़कर आधा प्याला पानी में डुबोकर निकाल लें और पानी पी लें।  अदरक का रस 10 ग्राम, शहद 10 ग्राम गर्म करके दिन में दो बार पिएँ, दमा, खाँसी के लिये बढ़िया दवा है। खटाई, दही, लस्सी' का परहेज करें।

नाभि का खिसकना और नाभि से जुड़ी कुछ आयुर्वेदिक समाधान

 नाभि का खिसकना और नाभि से जुड़ी कुछ आयुर्वेदिक समाधान... जब नाभि अपने स्थान से खिसक जाती है या हट जाती है, तो पेट बहुत तेज दर्द होता है, बल्कि जब तक नाभि अपने स्थान पर न आ में जाए, यह दर्द बराबर बना रहता है और इस कारण दस्त लग जाते हैं। आगे को झुकने और कोई वजन आदि उठाने में भी कठिनाई होती है। नाभि को अपने स्थान पर बिठाना चाहिए। जब नाभि अपने स्थान पर आकर सैट हो जाए, तो कुछ खाना भी अवश्य चाहिए। यदि नाभि बार-बार हट जाती है, तो उसे बार-बार बिठाने का प्रयास करते नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे वो झूठी पड़ जाती है। एक बार नाभि (नाप) बिठाने के पश्चात् दोनों पाँवों के अँगूठों में कोई नोटा काले रंग का धागा बाँध लेना चाहिए, इससे नाभि का हटना बन्द हो जाता है।   बीस ग्राम सौंफ को बीस ग्राम गुड़ में मिलाएँ और प्रातः काल खाली पेट सेवन करें। इससे अपने स्थान से हटी हुई नाभि यथा स्थान पर आ जाएगी।  नाभि पर सरसों का तेल मलने से नाभि के टलने, हटने अथवा खिसकने में लाभ होता है। रोग की तीव्रता होने पर रुई और ऊपर से कपड़े की पट्टी बाँध लें। कुछ दिनों की इस प्रक्रिया से वर्षों पुराना दोष भी जाता रहता है। 

पेट की गैस बनने पर आयुर्वेद में समाधान

पेट की गैस बनने पर आयुर्वेद में समाधान.. एक मीठा सेब लेकर उसमें 10 ग्राम लौंग चुभो दें। दस दिन बाद लौंग निकालकर तीन लौंग रोजाना खाएँ। साथ में एक सेब खाएँ, चावल की चीजों से परहेज करें।

पेचिश की समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज

 पेचिश की समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज... दही और चावल, मिश्री के साथ खाने से दस्तों में आराम मिलता है। सूखी मेथी का साग बनाकर प्रतिदिन खाएं अथवा मेथीदाना का चूर्ण v 3 ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। ऑव के रोग में लाभ होने के अतिरिक्त मूत्र का अधिक आना भी बंद हो जाता है। 100 ग्राम सूखे धनिया में 25 ग्राम काला नमक मिलाकर और पीसकर रख लें। भोजन के बाद आधा चम्मच की मात्रा में पाकर ऊपर से थोड़ा-सा पानी पी ले। दो-तीन दिन में ही असर देखने को मिल जाएगा

हृदय तथा रक्त संस्थान के रोग आयुर्वेद समाधान

 हृदय तथा रक्त संस्थान के रोग आयुर्वेद समाधान.. सेब का मुरब्बा 50 ग्राम की मात्रा में लें, चाँदी का वर्क लगाकर सुबह के वक्त सेवन करने से दिल की कमजोरी, दिल का बैठना आदि .. शिकायतें दूर हो जाएँगी। यह नुस्खा 15 दिन तक सेवन करें।  यदि आपने चार रोटी खानी हो, तो दो रोटी खाने के बाद आधा गिलास पानी में थोड़ा आँवले का रस डालकर पिएँ और फिर शेष दो रोटियाँ खाएँ। 21 दिन तक लगातार यह क्रिया करने से हृदय की दुर्बलता दूर हो जाती है। कच्चे आलुओं का रस हृदय की जलन को तुरंत दूर कर देता है। मिश्री के साथ पकी हुई इमली का रस पीने से भी हृदय रोग की जलन मिट जाती है। जिनके हृदय की धड़कन अधिक बढ़ी हुई हो, वे एक कच्चा प्याज नित्य भोजन के साथ खाएँ। इससे धड़कन सामान्य हो जाएगी तथा हृदय को शक्ति मिलेगी।  पिसा हुआ आँवला गाय के दूध के साथ पीने से हृदय से संबंधित समस्त रोगों का निपटारा हो जाता है।  सूखा आँवला और मिश्री समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच फंकी रोजाना पानी के साथ लेने से हृदय के सारे रोग दूर हो जाते हैं ! आंवले का मुरब्बा दूध से लेने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है तथा किसी प्रकार के ह्रदय विकार भी

भूख ना लगना खट्टी डकार आदि समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज

भूख ना लगना खट्टी डकार आदि समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज भूख न लगे, अजीर्ण हो, खट्टी डकार आती हों, तो एक नींबू आधा गिलास पानी में निचोड़कर शक्कर (चीनी) मिलाएँ और नित्य पिएँ। एक चम्मच अदरक का रस, नींबू, सैंधा नमक एक गिलास पानी में मिलाकर पिएँ । अनन्नास की फाँक पर नमक और काली मिर्च (पिसी हुई) डाल कर खाने से अजीर्ण दूर हो जाता है। अजीर्ण में पपीता खाना भी हितकर है।  प्याज का रस एक चम्मच दो-दो घंटे के अंतर से पीने से बदहजमी ठीक हो जाती है अथवा लाल प्याज काटकर और उस पर नींबू निचोड़कर भोजन के साथ खाने से अजीर्ण दूर होता है। बच्चों को अजीर्ण में प्याज के रस की पाँच बूँदें पिलाने से लाभ होता है।

निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) की आयुर्वेद में समाधान...

निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) की आयुर्वेद में समाधान...  100 ग्राम किशमिश को 200 ग्राम पानी में भिगो दें। रात भर भीगी रहने दें और प्रातः एक-एक किशमिश को खूब चबा चबाकर खाएं निम्न रक्तचाप में बहुत लाभ होता है। अत्यधिक लो ब्लड प्रेशर के कारण मूर्च्छा आ जाने पर हरे आंवले के रस में बराबर का शहद मिलाकर दो दो चम्मच पिलाते रहने से मूर्च्छा दूर हो जाती है। निम्न रक्तचाप वालों को छाछ में 2 ग्राम हींग मिलाकर पीने से लाभ होता है। दोपहर के भोजन के पश्चात छाछ पीना अमृत के समान है। गाजर के रस में शहद मिलाकर पीने से निम्न रक्तचाप का दोष दूर हो जाता है। गाजर का मुरब्बा भी लाभ करता है।

सिर दर्द सर का भारी होना और भी समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज

 सिर दर्द सर का भारी होना और भी समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज.. सिरदर्द होने के कई कारण होते हैं। कब्ज रहना, गैस बढ़ना, उच्च रक्तचाप होना, आँखों की ज्योति कमजोर होना, अति जागरण, अति परिश्रम, शरीर का कमजोर होना आदि कारणों से सिरदर्द होता हैं। सामान्य रूप से सिरदर्द होने पर निम्नलिखित कोई एक उपाय करना चाहिए ! अमृतधारा 4 बूँद एक बताशे पर टपका कर खाने और 2 बूँद रुमाल पर लगाकर सूँघने से सिरदर्द ठीक हो जाता है। नींबू के पत्तों का रस निकालकर नाक में दोनों तरफ टपकाने से सिरदर्द ठीक होता है।  चंदन पानी में घिसकर माथे पर लेप करने से गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द में लाभ होता है। तिल का शुद्ध तेल 250 मि.ली., चंदन का असली तेल 10 मि.ली., दाल चीनी का तेल 10 मि.ली. और कपूर 5 ग्राम इन सबको मिलाकर एक शीशी में भर लें। इस तेल को माथे पर लगाने से सिरदर्द में तुरंत आराम मिलता है। दो चम्मच आँवला चूर्ण में एक चम्मच शुद्ध घी मिलाकर खा लें, ऊपर से एक गिलास गुनगुना दूध पी जाएँ।  रोज सुबह खाली पेट एक मीठा सेब काटकर, नमक लगाकर चबाकर खाने से पुराना सिरदर्द दूर हो जाता है। यह प्रयोग दस दिन तक लगातार करें।

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) संबंधित समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज

 खसखस (सफेद) और तरबूज के बीज की गिरी अलग-अलग पोसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। सुबह और शाम एक-एक चम्मच खाली पेट खाएँ। इससे बढ़ा हुआ रक्तचाप धीमा हो जाता है। और रात में नींद भी अच्छी आती है। एक चम्मच मैथीदाना के चूर्ण की फंकी सुबह-शाम खाली पेट दो सप्ताह तक लेने से उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाता है। मुनक्का में लहसुन की कली रखकर खाना भी लाभदायक रहता है। सबेरे खाली पेट डाल का पका हुआ पपीता तीस दिनों तक खाएँ और इसके खाने के बाद दो घंटे तक न कुछ खाएँ, न पिएँ, इससे रक्तचाप सामान्य रहता है। गेहूं और चना बराबर मात्रा में लेकर आटा पिसवाएँ। चोकर (भूसी) सहित आटे की रोटी बनवाकर खाएँ। एक सप्ताह में ही रोग ठीक हो जाएगा। रात को किसी तांबे के गिलास या लोटे में पानी भरकर रखें और सुबह उठकर पी लें। इससे उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाता है। चार तुलसी की पत्तियाँ, दो नीम की पत्तियाँ, दो चम्मच पानी के साथ पीसकर खाली पेट लेने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।

दिमागी ताकत बढ़ाना, और ज्यादा क्षमता को मजबूत करने के लिए आयुर्वेद में समाधान...

 दिमागी ताकत बढ़ाना, और ज्यादा क्षमता को मजबूत करने के लिए आयुर्वेद में समाधान... एक किलो गाजर कद्दूकस कर, चार किलो दूध में पका लें। फिर उसमें एक पाव देशी घी और दस बादाम डालकर भूनें और काँच के बर्तन में भरकर रख लें। रोजाना पचास ग्राम खाकर ऊपर से दूध पी लें। एक महीने खाने से दिमाग को ताकत मिलेगी। एक सेब को आग में जलाकर पानी के घड़े में डाल दें। इस पानी को छानकर पीयें। सूखा धनिया, खसखस के दाने दोनों समान मात्रा में लेकर कूट पीस कर महीन चूर्ण कर लें। इसके बराबर वजन की मिश्री लेकर पीसकर इसमें मिला लें। एक-एक चम्मच की मात्रा में प्रातः 9 बजे व भोजन के बाद रात को 9 बजे गुनगुने गर्म मीठे दूध या जल के साथ नियमपूर्वक सेवन करें। इसके सेवन से स्मरण शक्ति, नेत्र ज्योति और गहरी नींद उपलब्ध होती है।

चक्कर आना और कमजोरी से संबंधित समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज

चक्कर आना और कमजोरी से संबंधित समस्याओं का आयुर्वेद में इलाज -  सूखा आँवला छह ग्राम धनिया सूखा दाने वाला छह ग्राम लेकर अधकूट करके रात में मिट्टी के बर्तन में अढाई सौ ग्राम पानी में भिगो दें। प्रातः मसलकर और छानकर, दो चम्मच पिसी हुई मिश्री मिलाकर पीने से चक्कर आने बंद हो जाते हैं। चाहे वो किसी भी कारण से आते हो।  यदि पेट की गड़बड़ी के कारण चक्कर आते हों, तो आधा गिलास गरम पानी में एक नींबू निचोड़कर पीने से लाभ होता है।  पच्चीस ग्राम मुनक्कों को देशी घी में सेंककर और सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आना बंद हो जाता है।  यदि गर्मियों में चक्कर आते हों, जी घबराता हो; तो आँवले का शर्बत पीने से लाभ होता है।

आधे सिर (सीसी) का दर्द की समस्या का आयुर्वेद में समाधान

 आधे सिर (सीसी) का दर्द की समस्या का आयुर्वेद में समाधान -  सिर के जिस तरफ के भाग में दर्द हो, उस तरफ के नथूने में छह आठ बूँद सरसों का तेल डालने अथवा सूँघने से दर्द एकदम बंद हो जाएगा। यह क्रिया चार-पाँच दिन करने से आधा सीसी का दर्द सदा के लिये दूर हो जाता है। देशी घी की दो-चार बूँदें नाक में रुई से टपकाने से अथवा सूँघने से आधा सीसी का दर्द जड़ से चला जाता है। इस प्रक्रिया को कम से कम एक सप्ताह अवश्य करें। लहसुन को पीसकर दर्द वाले भाग (आधे सिर) पर मलने से दर्द कपूर की तरह उड़ जाता है। इस प्रयोग को कई बार भी करना पड़ सकता है।

मिरगी - मिरगी आने पर कुछ घरेलू उपाय तथा आयुर्वेद में समाधान

 मिरगी - मिरगी आने पर कुछ घरेलू उपाय तथा आयुर्वेद में समाधान... स्नायु संबंधी रोगों में मिर्गी को सबसे भयानक रूप माना जाता है। इसका दौरा कभी भी और कहीं भी पड़ सकता है। इसके रोगी को आग,कुए, तालाब, नदी, पुल, रेलवे लाईन, बीच सड़क पर कभी अकेले नहीं जाने देना चाहिए तथा किसी भी किस्म की गाड़ी भी नहीं चलाने देना चाहिए। इस रोग में निम्न उपाय करना अधिक लाभदायक होता है !  तीन औंस प्याज का रस सुबह के समय थोड़ा-सा पानी मिलाकर पीने से मिरगी का दौरा पड़ना बंद हो जाता है। सवा महीने तक प्याज का रस अवश्य लेना चाहिए। यदि रोगी को दौरा पड़ा हो, तो प्याज का रस नथूनों पर लगा देने से वो होश में आ जाता है। लहसुन को कूटकर सुँघाने से मिरगी के रोगी को होश आ जाता है। यदि रोजाना लहसुन की आठ-दस कलियाँ दूध में उबालकर, वह दूध रोगी को पिलाया जाए, तो कुछ सप्ताह में ही मिरगी का रोग दूर हो जाता है है। करौंदे के पच्चीस-तीस पत्ते छाछ में पीसकर दो सप्ताह नित्य सेवन करने से मिरगी का दौरा पड़ना बंद हो जाता है। मिरगी के रोगी को एक पाव दूध में चौथाई कप मेंहदी का रस मिलाकर पिलाने से बहुत लाभ होता है। राई को पीसकर सुंघाने से मिरग

दांतों का हिलना की आयुर्वेदिक दवा

 तिल के तेल में काला नमक पीसकर मलने से दाँतों का हिलना बंद हो जाता है।

क्षय रोग (टी.बी.) के आयुर्वेदिक उपचार

 लहसुन को साफ करके पीस-छान कर पानी में मिलाकर रख लें, रोगी को दो-तीन चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार पिलाने से इस बीमारी में फायदा होता है। टी. बी. के रोगी को फूल गोभी का सूप पिलाते रहने से उसका रोग दूर होने में मदद मिलती है। मुनक्का, पीपल, देशी शक्कर समान भाग पीसकर एक चम्मच सुबह-शाम खाने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

दमा (श्वास रोग) के आयुर्वेदिक उपचार

एक अच्छा केला लेकर उसका छिलका निकाले बिना उसमें एक गड्ढा बनाये। फिर उसमें जरा-सा सेंधा नमक और काली मिर्च का चूर्ण भरकर रात भर चाँदनी रात में पड़ा रहने दें। सबेरे उसे आग में भूनकर खायें। इसको इसी तरह दिन में दो-तीन बार खाने से दमा रोग में आराम होगा। वैसे इस केले को पुष्य नक्षत्र के दिन चाँदनी रात में या शरद पूर्णिमा की चाँदनी रात में पड़ा छोड़कर अगले दिन खाने से विशेष फायदा होता है। इसबगोल साबुत ले आएँ। इसबगोल का सत्त या भूसी नहीं लेना है। इसका कचरा मिट्टी हटाकर साफ कर लें। सुबह-शाम 10-10 ग्राम इसबगोल पानी के साथ निगल जाएँ। एक माह में दमा विदा हो जाएगा। परहेज में चावल, तले पदार्थ, गुड़, तेल, खटाई, बादी वाले पदार्थ कतई नहीं लेवें और ठीक हो जाने के बाद भी कम से कम छः माह तक परहेज जारी रखें।

मुंह के छाले की आयुर्वेद में समाधान..

मुहं, होंठ एवं दांतों के रोग  (मुंह के छाले) |मुंह के छाले की आयुर्वेद में समाधान.. मुंह के छाले होने पर मुलेठी चूसें, छाले ठीक हो जाएंगे। कत्थे के साथ अमरूद की पत्तियाँ चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते है । जबान पर छाले पड़ने पर एक केला गाय के सेवन करें, छालों में आराम मिलेगा।

मसूड़ों से खून आने पर आयुर्वेद में उसका समाधान

 मसूड़ों से खून आने पर आयुर्वेद में उसका समाधान :  नमक, हल्दी और फिटकरी बराबर मात्रा में लें, खूब पीसकर चूर्ण करें, फिर इस चूर्ण से मंजन करें। बर्फ, बहुत गर्म और शीतल पेय से बचें। गाजर, सेब, आँवला, शलजम जैसी चीजों का सेवन करें।

पायरिया की समस्या का आयुर्वेदिक समाधान

पायरिया की समस्या का आयुर्वेदिक समाधान - आम के गुठली की गिरी के महीन चूर्ण का मंजन करने से पायरिया ठीक हो जाता है। पत्तियों सहित नीम की टहनी को छाया में सुखाकर जला लें और पिसे। इसमें कुछ लोग, पिपरमेंट और नमक मिलाएं। सुबह शाम इससे दांत मांजने से पायरिया रोग ठीक हो जाता है।

मुंह की दुर्गंध का आयुर्वेदिक इलाज तथा मुंह से गंदी बात आने पर घरेलू तरीके...

मुंह की दुर्गंध का आयुर्वेदिक इलाज तथा मुंह से गंदी बात आने पर घरेलू तरीके... भोजन के पश्चात् दोनों समय आधा चम्मच सौंफ चबाने से दुर्गन्ध ही दिनों में जाती रहती है और पाचन क्रिया भी ठीक हो जाती है।  तुलसी के चार पत्ते नित्य प्रात: खाकर, ऊपर से पानी पीने से भी मुँह की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।  एक गिलास पानी में एक नींबू का रस मिलाकर प्रात: कुल्ले करने से मुख की दुर्गन्ध दूर हो जाती है। एक लौंग मुँह में रखकर (भोजनोपरांत) चूसने से मुँह से दुर्गन्ध आनी बंद हो जाती है। चार ग्राम अनार के पिसे हुए छिलकों की फंकी सुबह-शाम पानी से लेने से दुर्गन्ध दूर हो जाती है। छिलके को उबालकर कुल्ला करने से भी लाभ होता है। जीरे को भूनकर खाने से भी मुँह की दुर्गन्ध समाप्त हो जाती है।  हरा धनिया खाने से मुँह में सुगंध रहती है। भोजन के पश्चात् थोड़ा-सा हरा धनिया अवश्य चबाना चाहिए।  एक चम्मच अदरक का रस, एक गिलास गरम पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुँह की दुर्गन्ध जाती रहती है।

कान का बहना और काम संबंधित सभी समस्याओं का आयुर्वेदिक समाधान

 कान का बहना और काम संबंधित सभी समस्याओं का आयुर्वेदिक समाधान - तुलसी के पत्तों का रस, अदरक का रस, शहद, कड़वा तेल समान मात्रा में मिलाकर उसमें जरा-सा सेंधा नमक पीसकर मिला लें, इसको शीशी में भरकर रख लें। इसे जरा गर्म करके 2-2 बूँद कानों में टपकाने से कान बहना और पकना आदि ठीक हो जाते हैं। यदि किसी बच्चे का कान बहता हो, तो लहसुन के साथ नीम की दस-बारह कोपलें या पाँच-सात पत्तियाँ भी पानी में उबालें। तत्पश्चात् जिस तरफ का कान बहता हो, उसमें रात को सोने से पूर्व इस पानी की दो-तीन बूँदें डालें और रुई लगाएँ। इससे कान का बहना बंद हो जाता है। जब तक पूरी तरह आराम न हो जाए, प्रतिदिन यह क्रिया करते रहें।   नींबू के रस में सज्जीखार मिलाकर कान में डालने से कान का बहना बंद हो जाता है।  दस ग्राम लहसुन को छह ग्राम सिंदूर के साथ पीसकर, सौ ग्राम सरसों में डालकर अग्नि पर पकाएँ। जब तेल आधा रह जाए, तब उतारकर छान लें और काँच की किसी शीशी में भर लें। इसकी दो-तीन बूँद दिन में दो-तीन बार कान में टपकाने से कान का बहना बंद हो जाता है।

कान के अंदर कीड़ा चले जाने पर करें यह आयुर्वेदिक उपाय | कान में खुजली कान में घाव लगना या अन्य कान संबंधित इन्फेक्शन की आयुर्वेदिक उपचार...

कान में कीड़ा चले जाने पर करें यह आयुर्वेदिक उपाय - कान में कीड़ा चला गया हो, तो सरसों के तेल को गरम करके डालने से कीड़ा शीघ्र बाहर निकल जाता है। कान में चींटी के चले जाने पर फिटकरी को घोलकर कान में डालें, चींटी बाहर निकल जाएगी।  किसी भी प्रकार का कीड़ा कान में घुस गया हो, तो सादे पानी में नमक घोलकर कान में डालें और उल्टा दें। पानी के साथ कीड़ा भी निकल जाएगा। कान में पानी चले जाने पर और कान से सायं-सायं की आवाज आने पर यह आयुर्वेदिक उपाय... गुड़ और घी मिलाकर गरम करें और खाएँ, उससे कान में होने वाली ‘सायं-सायं’ की आवाज दूर हो जाती है। कान में किसी भी तरह से पानी चला गया हो, तो तिल का गरम तेल डालना लाभप्रद होता है।

कान और नाक के रोग आयुर्वेदिक उपचार | घरेलू तरीकों से कान के दर्द को दूर करें...

 कान और नाक के रोग आयुर्वेदिक उपचार | घरेलू तरीकों से कान के दर्द को दूर करें... लहसुन की दो कलियां छीलकर कूट लें। फिर उन्हें थोड़े से शुभ तिल के तेल में मिलाकर गर्म करें। गर्म हो जाने पर उतारकर छान लें।गुनगुना होने पर इस तेल की दो-तीन बूँदें कान में डालने से कान के दर्द में शीघ्र आराम मिलता है।  तिल के शुद्ध तेल में थोड़ी-सी अजवाइन को पकाकर छान लें। हल्का गुनगुना होने पर इस छने हुए तेल की छह-सात बूँदे कान में टपकाएँ। प्याज को गर्म राख में भूनकर उसका पानी पीयें। निचोड़कर कान में डालें, दर्द में आराम होगा।

होठों का फटना,होंठों पर पपड़ी जमना और होंठों संबंधित आयुर्वेदिक उपचार।

होठों का फटना,होंठों पर पपड़ी जमना और होंठों संबंधित आयुर्वेदिक उपचार ।  सर्दियों में होंठों के फटने की शिकायत एक आम बात है। यदि आधा चम्मच दूध की मलाई में चुटकी भर हल्दी का बारीक चूर्ण मिलाकर होंठों पर मला जाए, तो यह शिकायत दूर हो जाती है।  यदि शुष्क वायु से होंठ फट गए हों, तो रात को सोते समय शुद्ध सरसों का तेल या गुनगुने घी को नाभि में लगाएँ। शुष्क वायु कारण होंठों पर पपड़ी जम जाने पर रात में सोने से पूर्व होंठों पर बादाम रोगन लगाकर सोएँ। इससे पपड़ी दूर होकर होंठ मुलायम हो जाएँगे तथा आगे पपड़ी भी नहीं जमेगी। प्रातः स्नान से पूर्व हथेली पर थोड़ा-सा मूंगफली का तेल लेकर अँगुली से हथेली में रगड़ें। फिर होंठों पर इस तेल की मालिश करें। न होंठ फटेंगे और न ही उन पर पपड़ी जमेगी। देशी घी में नाममात्र का नमक मिलाकर होंठों और नाभि पर लगाने से होंठों का फटना बंद हो जाएगा। ग्लिसरीन लगाने से भी होंठों का फटना बंद हो जाता है।

जी मिचलाना एवं उल्टी आना , पेट का दर्द की आयुर्वेदिक उपचार...

 जी मिचलाना एवं उल्टी आना -  आधे नींबू के रस में आधा ग्राम जीरा और आधा ग्राम छोटी इलायची के दाने पीसकर 50 ग्राम पानी मिलाकर दो - दो घण्टे में पिलायें , उल्टी बंद करने के लिये बहुत बढ़िया नुस्खा है ।   10 ग्राम अदरक के रस में 10 ग्राम प्याज का रस मिलाकर पिलायें ।  पेट का दर्द -  वात प्रकोप के कारण पेट फूलने और अधोवायु न निकलने पर पेट का तनाव बढ़ता है , जिससे पीड़ा होती है । अजवाइन और काला नमक पीसकर दोनों समान मात्रा में मिलाकर रख लें । इसे 1 चम्मच मात्रा में गर्म पानी के साथ फाँकने से अधोवायु निकल जाती है , जिससे पेट का तनाव और दर्द मिट जाता है ।   अमृतधारा की 3-4 बूँद बताशे पर टपका कर खाने से पेट दर्द में आराम हो जाता है ।  अपच के कारण पेट दर्द हो रहा हो , तो 10 ग्राम साबूत राई एक कप पानी के साथ बिना चबाए निगल जाएँ , आराम हो जाएगा । 

पेट की जलन के घरेलू नुस्खे.. आयुर्वेदिक तरीके से पेट की जलन को मिटाएं...

 पेट की जलन की आयुर्वेदिक दवा -  ज्यादा चाय पीने या मिर्च-मसालों का सेवन करने से यदि पेट में जलन महसूस हो, तो कच्चे सिंघाड़े का सेवन करें, अवश्य फायदा होगा।

भूख न लगना की घरेलू उपाय और शरीर में सबसे अत्यधिक भूख लगने की समस्या की आयुर्वेदिक दवा

 भूख न लगना की आयुर्वेदिक दवा -   अदरक का रस आधा चम्मच और शहद आधा चम्मच दोनों वक्त खाने के बाद लें। जीरा एक चम्मच, हींग एक चुटकी, काला नमक चौथाई चम्मच और अजवाइन एक चुटकी लेकर सबको आधा गिलास पानी में मिलाकर दिन में दो बार लें। मैथी का हरा साग पेट को ठण्डक पहुँचाने वाला एवं भूख बढ़ाने वाला होता है। ( भस्मक ) भोजन करने के पश्चात तुरंत भूख लग जाने की समस्या का आयुर्वेद में इलाज - भोजन करने के थोड़ी ही देर बाद फिर से भूख लगने लगती है। इसे भस्मक रोग कहते हैं। इस रोग के रोगी को केले का गुदा 5० ग्राम और एक चम्मच शुद्ध घी दिन में दो बार सुबह-शाम खाना चाहिए।

पेट के कीड़े - पेट के कीड़े मारने का तरीका पेट में कीड़े होने का इलाज आयुर्वेदिक इलाज पेट के कीड़ों का आयुर्वेदिक

 पेट के कीड़े साफ करने का तरीका - आधा चम्मच राई - चूर्ण एक कटोरी ताजा दही में मिलाकर एक सप्ताह तक सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं । दो टमाटर, कालीमिर्च, नमक के साथ निराहार खाने से पेट के कीड़े मर कर खत्म हो जाते हैं। पेट के कीड़े मारने का तरीका पेट में कीड़े होने का इलाज आयुर्वेदिक इलाज पेट के कीड़ों का आयुर्वेदिक 

एसिडिटी (अम्लपित्त) की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज...

 अम्लपित्त (एसिडिटी) की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज...  हरड़ यह अम्लपित्त की एक श्रेष्ठ औषधि है। छोटी काली हरड़ का चूर्ण दो ग्राम लेकर उसमें दो ग्राम ही गुड़ मिलाएँ और संध्याकाल के भोजन के पश्चात् खाकर ऊपर से पानी पी लें। इसके प्रयोग से एक सप्ताह के अंदर ही अम्लपित्त नष्ट हो जाएगी । दोनों समय के भोजन के पश्चात् एक-एक लौंग चूसने से अम्लपित्त का दोष जाता रहता है। लौंग अमाशय की रस-क्रिया को बल प्रदान करती है। अम्लपित्त के रोगी को चाय नुकसान पहुँचाती है। अतः जब तक यह दोष दूर न हो जाए, चाय का प्रयोग नहीं करना चाहिए।   अम्लपित्त में नींबू बड़ा प्रभावशाली सिद्ध होता है। नींबू का रस गरम पानी में डालकर सायंकाल पीने से अम्लपित्त नष्ट हो जाता है। एक कप गरम पानी और एक चम्मच नींबू का रस एक-एक घंटे के अंतर से तीन बार लें, लाभ होगा। अम्लपित्त (एसिडिटी)  हरड़ यह अम्लपित्त की एक श्रेष्ठ औषधि है। छोटी काली हरड़ का चूर्ण दो ग्राम लेकर उसमें दो ग्राम ही गुड़ मिलाएँ और संध्याकाल के भोजन के पश्चात् खाकर ऊपर से पानी पी लें। इसके प्रयोग से एक सप्ताह के अंदर ही अम्लपित्त नष्ट हो जाएगी। एसिडिटी  (अम्लपित्त)  की स

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  बवासीर क्या है -  दोस्तों मैं वैसे जो है एक बहुत ही सामान्य समस्या है यह पुरुषों तथा महिलाओं में लगभग बराबर मात्रा में होती है जो लैट्रिन का रास्ता होता है उसमें जब स्वेलिंग आ जाती है फिर कोई प्रॉब्लम होती है तभी हमें पता लगता है कि हमें पाइल्स या बवासीर की समस्या है बवासीर में खून का गुच्छा होता है उस खून के गुच्छे में खून इकट्ठा हो जाएगा तो वह बवासीर का रूप ले लेगा । लगभग 50% मरीज जिनको बवासीर की समस्या होती है उनको ब्रीडिंग की प्रॉब्लम भी होती है विज्ञान ऐसा मानती है कि 50 साल की उम्र के बाद 50% जो पापुलेशन है वह बवासीर की समस्याओं से ग्रसित हो जाते हैं यानी अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो जाती है तो आपको बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा माना जाता है कि पाइल्स प्रेग्नेंट महिलाओं को ज्यादा होता है ! पाइल्स क्या है -  वास्तव में जो हमारा लाइटिंग का रास्ता होता है उसमें खून की नसों के गुच्छे होते हैं यह कॉमन है या सभी को होते हैं लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे समय बढ़ते जाता है लैट्रिन के रास्ते में ज्यादा ताकत लगाने के कारण यह जो खून के नसों के गुच्छे हैं वह फूल जाते हैं जब यह

यूरिन इन्फेक्शन की आयुर्वेदिक दवा | यूटीआई से बचने के उपाय ...

  यूरिन इन्फेक्शन क्या है -  यूरिन इन्फेक्शन को यूटीआई भी कहते हैं जिसका मतलब होता है यूरिन ट्रैक इंफेक्शन। यानी कि जो हमारा यूरिन का मार्ग है जो कि किडनी से स्टार्ट होता है किडनी के बाद जो यूरिटल नलिया होती हैं और जो यूरिनरी ब्रेडल होता है और उसके बाद जो यूरिनरी वेसल होता है जिसके माध्यम से यूरिन बाहर निकलता है इस पूरे सिस्टम में जब कहीं पर भी इंफेक्शन हो जाता है तो उसको यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन बोलते हैं ! यूरिन इन्फेक्शन का कारण -  दोस्तों ! आइए हम यहां थोड़ा सा यूरिन इंफेक्शन के कारण के बारे में भी जान लेते हैं अगर हम आयुर्वेदिक भाषा में कहें तो आमतौर पर जब यूरो यूरिनरी ट्रैक में ज्यादा गर्मी हो जाएगी क्योंकि हम अक्षर आमतौर पर देखते हैं कि यूरिन इन्फेक्शन में जलन की समस्या होती है दर्द की समस्या होती है इसीलिए आयुर्वेद में कहा जाता है कि यदि आपका पित्त ज्यादा बढ़ेगा तो आपको यूटीआई की समस्या हो सकती है ! इसीलिए पित्त वर्धक भोजन जैसे मिर्च मसालेदार खाना तला हुआ तला हुआ बहुत ज्यादा तीखा, खट्टा या चाय, कॉफी, अल्कोहल स्मोकिंग यह सब यूरिन इन्फेक्शन के कारण होते हैं और कुछ लोग कम पानी पीते