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हृदय तथा रक्त संस्थान के रोग आयुर्वेद समाधान

 हृदय तथा रक्त संस्थान के रोग आयुर्वेद समाधान..

  1. सेब का मुरब्बा 50 ग्राम की मात्रा में लें, चाँदी का वर्क लगाकर सुबह के वक्त सेवन करने से दिल की कमजोरी, दिल का बैठना आदि .. शिकायतें दूर हो जाएँगी। यह नुस्खा 15 दिन तक सेवन करें। 
  2. यदि आपने चार रोटी खानी हो, तो दो रोटी खाने के बाद आधा गिलास पानी में थोड़ा आँवले का रस डालकर पिएँ और फिर शेष दो रोटियाँ खाएँ। 21 दिन तक लगातार यह क्रिया करने से हृदय की दुर्बलता दूर हो जाती है।
  3. कच्चे आलुओं का रस हृदय की जलन को तुरंत दूर कर देता है। मिश्री के साथ पकी हुई इमली का रस पीने से भी हृदय रोग की जलन मिट जाती है।
  4. जिनके हृदय की धड़कन अधिक बढ़ी हुई हो, वे एक कच्चा प्याज नित्य भोजन के साथ खाएँ। इससे धड़कन सामान्य हो जाएगी तथा हृदय को शक्ति मिलेगी।
  5.  पिसा हुआ आँवला गाय के दूध के साथ पीने से हृदय से संबंधित समस्त रोगों का निपटारा हो जाता है। 
  6. सूखा आँवला और मिश्री समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच फंकी रोजाना पानी के साथ लेने से हृदय के सारे रोग दूर हो जाते हैं !
  7. आंवले का मुरब्बा दूध से लेने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है तथा किसी प्रकार के ह्रदय विकार भी नहीं होते हैं।
  8. 15 ग्राम शहद में दो केले मिलाकर खाने से ह्रदय का रोग दूर हो जाता है। लीची उत्तम स्वास्थ्यवध्र्दक है। यह ह्रदय को शक्ति प्रदान करती है।

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