Skip to main content

बुद्ध पूर्णिमा - बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है...?

बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है !


बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्मा वलियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध इस धरती पर अवतरित हुए थे इसी दिन भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उन्होंने महापरिनिर्वाण भी प्राप्त किया था इसीलिए वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित तीन घटनाएं इसी दिन घटित हुई थी यह तीन बड़ी घटनाएं इस प्रकार हैं भगवान बुद्ध का जन्म भगवान, बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति या बुद्धत्व की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण दोस्तों ऐसा उदाहरण दुनिया में और कहीं नहीं है भगवान बुद्ध को जब जीवन की सच्चाई का ज्ञान हुआ तब उन्होंने अपना महल गृहस्थ जीवन सारे संसार के सुखों को त्याग कर के सत्य की खोज में निकल पड़े थे लगभग 7 वर्षों तक कठिन तपस्या के बाद वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया जो कि बिहार में है बौद्ध वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई इसलिए इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है !

 जाने बुद्ध पूर्णिमा का महत्व और इससे जुड़ी मान्यताएं बुद्ध पूर्णिमा का दिन से बौद्ध धर्म के लिए ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म के लिए भी एक पवित्र दिन है दरअसल हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि भगवान बुद्ध हिंदू देवता भगवान विष्णु के नवे अवतार हैं इसीलिए हिंदू धर्म में भी इस दिन को बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है यही कारण है कि बहुत गया हिंदू तथा बौद्ध धर्म वालों का पवित्र स्थान है दुनिया भर के बौद्ध अनुयाई गया में भगवान बुद्ध के दर्शन करने आते हैं इसी दिन को सत्य विनायक पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है !

 मान्यता है कि भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा बहुत गरीब थे एक बार व कृष्ण से मिलने उनके महल पहुंचे तब कृष्ण ने सुदामा को उनके कष्टों के निवारण हेतु सत्य विनायक व्रत करने को सुझाव दिया सुदामा ने कृष्ण की बात माने और इस व्रत को विधिवत किया तो उनके कष्टों का निवारण हो गया दोस्तों इस दिन धर्मराज की पूजा भी की जाती है कहते हैं कि शक्ति विनायक की पूजा से मृत्यु के देवता धर्मराज प्रसन्न हो जाते हैं और उनके प्रसन्न हो जाने से अकाल मृत्यु काम खत्म हो जाता है पूर्णिमा का दिन भगवान बुद्ध को समर्पित है पूर्णिमा के दिन स्नान करना पवित्र माना जाता है लेकिन वैशाखी पूर्णिमा बहुत ही खास होती है इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि में में होते हैं और चंद्रमा भी अपनी अपनी उच्च राशि तुला में होते हैं, !

गौतम बुद्ध का जीवन का इतिहास -


दोस्तों भगवान बुद्ध का जन्म 1563 एसबी पूर्व वैशाख पूर्णिमा के दिन लुंबिनी जो कि नेपाल में हैं शाक्य कुल की राजा शुद्धोधन और महारानी महामाया के घर में हुआ था बालक का नाम सिद्धार्थ रखा गया था गौतम गोत्र में जन्म लेने के कारण उन्हें गौतम भी कहा जाता था की माता का निधन इनके जन्म के सातवें दिन हो गया था ऐसा कहा जाता है कि सिद्धार्थ के जन्म समारोह के दौरान एक साधु ने सिद्धार्थ का भविष्य पढ़ते हुए यह बताया था की यह बच्चा याद तो एक महान राजा बनेगा या तो महान पवित्र पथ प्रदर्शक बनेगा इनका लालन-पालन महारानी की छोटी बहन गौतमी ने किया गौतम के मन में बचपन से ही अपार दया करो राथी मैं किसी को दुखी नहीं देख सकते थे सिद्धार्थ के चचेरे भाई देवदत्त द्वारा तीर से घायल हंस के सिद्धार्थ ने खूब सेवा कर उसकी प्राणों की रक्षा की दोस्तों सिद्धार्थ ने गुरु विश्वामित्र से वेद पुराण उपनिषदों राजकाज कार्य और युद्ध विद्या सीखी कुश्ती घोड़ा दौड़ और तीर कमान चलाने में वह माहिर थे दोस्तों 16 वर्ष की उम्र में सिद्धार्थ का विवाह राजकुमारी यशोधरा के साथ कर दिया गया था पिता द्वारा सारी सुख सुविधाओं का प्रबंध किया गया राजकुमार सिद्धार्थ तथा राजकुमारी यशोधरा को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम राहुल रखा गया राज महल सारे सुख सुविधाओं से भरपूर होने के बावजूद भी सिद्धार्थ का मन महल में नहीं रमता था जीवन के सच्चे रंग जन्म जवानी बुढ़ापा रोग मृत्यु सन्यासी देखने के बाद उनका संसार तथा भौतिकी सुखो से मुंह भंग हो गया और संसारी समस्याओं से दुखी होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया राज महल पत्नी तथा पुत्र को छोड़कर तपस्या के लिए चल पड़े जिसे बहुत धर्म में महा वृक्ष भ्रमण कहा जाता है बिना अन्ना और जल ग्रहण किए बिना 6 साल की कठिन तपस्या बाद 35 साल की आयु में वैशाख पूर्णिमा की रात निरंजन नदी के किनारे पीपल के पेड़ के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ को गौतम बुद्ध के नाम से जाने जाना लगा जिस जगह पर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ उसे बोधगया तथा जिस वृक्ष के नीचे उन्हें उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ उसे बोधि वृक्ष कहा जाता है बोधिसत्व का मतलब होता है ज्ञान प्राप्त करना तथा सभी सांसारिक सुखों का त्याग करना ज्ञान प्राप्ति के बाद महात्मा बुद्ध आषाढ़ मास की पूर्णिमा को काशी के पास मृतदाहवाह जो कि सारनाथ में है वहां पहुंचे और वहीं पर सबसे पहले उन्होंने अपना धर्म उपदेश दीया जिससे बौद्ध ग्रंथों में धर्म चक्र परिवर्तन कहा जाता है और पांच मित्रो को अपना अनुयाई बनाया और फिर उन्हें धर्म प्रचार के लिए भेज दिया बुद्ध की मृत्यु 80 साल की उम्र में 483 ईसवी पूर्व वैशाख पूर्णिमा के दिन देवरिया जिले के कुशीनगर में शुद्र द्वारा किए गए भोजन को खाने के बाद हो गई जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहां जाता है !

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व -


 इस वक्त विश्व में लगभग 180 करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयाई हैं और बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा त्यौहार है इस दिन अनेक प्रकार के कार्यक्रमों को आयोजित किया जाता है अलग-अलग देशों में वहां की संस्कृति रिती रिवाज के अनुसार ही बुद्ध पूर्णिमा को मनाया जाता है और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है बौद्ध धर्म के लोग इस दिन मंदिरों और घरों में अगरबत्ती या दीपक जलाते हैं तथा घरों को फूलों से सजाया जाता है तथा बौद्ध धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाता है दीपक जलाकर भगवान बुद्ध की पूजा की जाती है फल फूल अर्पित करते हैं बुद्ध पूर्णिमा के दिन संभव हो सके तो बौद्ध धर्म के अनुयाई बौद्ध वृक्ष का दर्शन करते हैं इस दिन पवित्र बोधि वृक्ष की पूजा की जाती है उसकी शाखाओं को रंगों से सजाया जाता है तथा उसकी जड़ों मैं दूध तथा सुगंधित पानी डाला जाता है मंदिर के आसपास दिए जलाए जाते हैं तथा साधना की जाती है सुखद भविष्य के लिए भगवान बुध का आशीर्वाद लिया जाता है दिल्ली संग्रहालय में बुद्ध की अस्थियों को सुरक्षित रखा गया है लेकिन वैशाख पूर्णिमा के दिन इन अस्थियों को लोगों के दर्शन हेतु बाहर निकाला जाता है जिससे कि बौद्ध धर्मआकर महा कर प्रार्थना कर सकें पूर्णिमा को अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे- वैशाख पूजा ,वैशाख पूर्णिमा ,बुद्धपूर्णिमा आदि श्रीलंका एवं अन्य दक्षिणी पूर्व एशियाई देशों में इस दिन को वैशाख उत्सव के रूप में मनाया जाता है दोस्तों बुद्धपूर्णिमा का त्यौहार -भारत ,नेपाल ,सिंगापुर, वियतनाम, थाईलैंड, जापान मलेशिया, श्रीलंका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान तथा विश्व के अन्य देशों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है तो दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी आवश्यक जानकारियां मिली होंगी !




Comments

Popular posts from this blog

अपने जन्माष्टमी समारोह को थोड़ा खास बनाएं

 जन्माष्टमी का उत्सव भगवान कृष्ण को उनकी संपूर्णता में आमंत्रित करने के लिए समर्पित है। घटना की प्रशंसा करने के हर किसी के अपने विशेष तरीके होते हैं, वैसे भी, कुछ समारोह ऐसे होते हैं जो सामान्य होते हैं। निम्नलिखित कुछ ऐसे रिवाज़ हैं जिन्हें आप जश्न मनाने और उत्सव में कुछ और हिस्सा लेने के लिए कर सकते हैं।  दिन की छुट्टी पर उपवास शुरू करें -  उपवास जन्माष्टमी अवसर के सबसे मौलिक और सर्वव्यापी टुकड़ों में से एक है। आप आम तौर पर उत्सव की अधिक प्रशंसा करने के लिए घटना पर एक त्वरित नोटिस कर सकते हैं।  गुच्छा प्रतिबिंब धुनों और सेरेनेड्स में भाग लें -    गायन कीर्तन, या प्रतिबद्धता, महिमा, या प्रशंसा की धुन, जन्माष्टमी उत्सव का एक और महत्वपूर्ण घटक है। इस तथ्य के अलावा कि यह मूर्खता और प्रतिबिंब है, यह वास्तव में एक उत्सव के एक टुकड़े की तरह महसूस करने का कारण बनता है। इसी तरह, कीर्तन व्यक्तियों को एकजुट करते हैं।  अभयारण्य के लिए पुष्पांजलि और विभिन्न डिजाइनों की योजना बनाएं -    इस अवसर के सख्त और खुश घटकों में भाग लेने के लिए अपने घर या अपने पड़ोसी में अभयारण्य को सजाने में सहायता कर

Aate ke laddu banane ke tarike | आटे के लडडू के बारे में कुछ खास तरीके

Aate ke laddu banane ke tarike | आटे के लडडू के बारे में कुछ खास तरीके   आज हम आप को ठण्ड के मोसम में खाने वाले आटे के लडडू के बारे में कुछ खास बातें बताएंगे और उन को बनाने का तरीका भी आइए जानते हैं ।             इस ठण्ड के मौसम में बहुत तरह के लडडू बनाये जाते हैं जैसे चावल के आटे के लडडू और गैहू के आटे के लडडू और गौद के लडडू  और भी विभिन्न प्रकार के पकवान त्योहारों पर हमारे भारत में बनाए जाते हैं । लेकिन मैं आज आपके एक एसे लडडू बनाने के बारे में बताये गै जो आप ने कभी नहीं बनाये होगे यह लडडू ठण्ड के मोसम में हमारे लिए बहुत गुणकारी होते हैं कयोकि इन लडडू को बनाने में कुछ खास चीजें लगतीं है जो हमारे शरीर के लिए बहुत गुणकारी होती है कयोकि अकेले आटे के लडडू खाने से हमारे शरीर को कोई ताकत नही मिलती वो तो हम ठण्ड में खाने के लिए बना लेते हैं । आज में जो लडडू बनाने के बारे में बताऊँ गी वह हमारे लिए एक दवाई काम करते हैं ।             यह लडडू बनाने के लिए हम काले चननो का आटा लेगें यह आटा काले चननो को साबित पीस कल लेगें हमे बेसन नहीं लेना हमें साबुत काले चननो को घर पर पीस लेना है या फिर बाहर किस

सफेद दाग क्या होता है - सफेद दाग होने के कारण ,सफेद दाग का आयुर्वेदिक इलाज...

सफेद दाग क्या होता है - दोस्तों! सफेद दाग जन्म के बाद आने वाला स्किन प्रॉब्लम है जिसमें हमारी स्किन में जो कलर देने वाली पेशियां होती हैं वह मर जाती हैं हमारे स्कीम पर मिल्की वाइट या दूध जैसे सफेद दाग आने लगते हैं और हमारे स्क्रीन के लेयर में जो मेलानोसाइट्स नाम की जो पेशी होती है जो आपकी स्किन को कलर देती है यह मेलेलिन साइड जो रहती है वह मेलेलिन नाम की पिगमेंट बनाती है यह वेल्डिंग पिगमेंट की वजह से ही हमारे स्कूल में जो भी कलर है वह आता है इस मेलेलिन पिगमेंट की आपकी स्किन में होने वाले मात्रा के अनुसार है आपका स्क्रीन का जो कलर है वह निर्धारित होता है मेलेनिन पिगमेंट जब स्किन में ज्यादा होता है तब स्किन का कलर डार्क ब्राउन या सांवली दिखती है और अगर यह मेलेलिन पिगमेंट कम होता है तो आप की स्कीन गोरी या फिर दिखती है । सफेद दाग के शुरुआती लक्षण -  दोस्तों! इस रोग में रोगी को किसी तरह की दिक्कत तो नहीं होती है मगर सफेद दाग चेहरे और हाथ पैर पर दिखाई देते हैं जिसके कारण रोगी कुरुप नजर आता है इस कारण रोगी तनाव हीन भावना और डिप्रेशन में रहता है रोगी की स्क्रीन पर छोटे-छोटे सफेद धब्बे दिखाई देत

lampi virus से अपनी गाय को बचाने के लिए निम्न प्रकार की सावधानियां रखें आइए जानते हैं कैसे...

lampi virus   आज पूरे भारतवर्ष में हमारी गाय माता पर हावी है जिसकी वजह से हमारी गायों को अत्यधिक नुकसान हो रहा है और हमारे किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं लेकिन आज हम जानेंगे लंबी वायरस से अपने गायों को बचाने के लिए कुछ बेहतरीन सावधानियां जिनसे कुछ चांस कम हो जाएंगे lampi virus होने के आइए जानते हैं -- साफ सफाई का रखें ध्यान - अगर गायों को रखने वाला जगह साफ सुथरा नहीं है तो वहां से गायों को इन्फक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए कोशिश करेगी गायों को रखने वाले स्थान यानी कि तबेला साफ सुथरा रखें और अगर वहां पर कीचड़ हमेशा बना रहता है तो उस कीचड़ में मिट्टी का तेल अवश्य डालें या उसकी जड़ में मिट्टी के तेल का छिड़काव करें इससे कीचड़ में किसी भी तरह की बैक्टीरिया और वायरस नहीं बनेंगे ! खानपान हरियाली - समय के साथ हर जियो अपनी धीरे-धीरे पोलूशन बड़ी दुनिया में अपनी पाचन क्रिया को होता जा रहा है खेतों में अच्छी प्रकार हरियाली लाने के लिए यूरिया डाई कार्बोनेटेड क्या दिखा दो का उपयोग किया जा रहा है जो हमारे सेहत के लिए कहीं न कहीं अच्छा नहीं है यहां हम बात उन किसानों की कर रहे हैं जो कई लोग बा

एलर्जी खांसी की आयुर्वेदिक दवा

 एलर्जी क्या होता है -  दोस्तों सामान्य था जो एलर्जी होती है ऐसा होता है कि हमारे शरीर में कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस प्रवेश करते हैं रोजमर्रा में जिंदगी में जो यह वायरस और बैक्टीरिया होते हैं इनको हमारी बॉडी की इम्यून सिस्टम पहचानती है और इन के विरुद्ध आक्रमण करती है और किसके द्वारा वह वायरस और बैक्टीरिया को खत्म कर देती है जिससे कि शरीर पर विपरीत प्रभाव ना पड़े और शरीर को नुकसान नहीं पहुंचे लेकिन गड़बड़ वहां हो जाती है जहां शरीर की इम्यून सिस्टम कमजोर होती है ऐसी कुछ चीजें रहती हैं जो हमारे शरीर की दोस्त रहती हैं लेकिन वह दोस्त नहीं दुश्मन समझ लेती है जैसे कि हवा में उड़ के नाक के द्वारा अंदर जाने वाले एनिमल डेंजेल होते हैं कई अलग-अलग प्राणी होते हैं जैसे कि डॉग हुआ गाय हुई इस तरह से इनकी शरीर से बारीक- बारीक रेशे निकलते हैं जो सूखकर नाक के द्वारा अंदर जाते हैं सामान्यतः तो यह सभी को जाते हैं लेकिन कुछ लोगों में यह शरीर की जो इम्यून सिस्टम है उससे रिएक्ट करना शुरू कर देती है और वह रिएक्शन होता है उसी हम एलर्जी कहते हैं और सामान्यतः यह जो एलर्जी है वह 3- 4 तरह की एलर्जी होती है

तनाव से छुटकारा कैसे प्राप्त करें | तनाव मुक्त जीवन जीने के कुछ सरल उपाय

 तनाव से छुटकारा कैसे प्राप्त करें | तनाव मुक्त जीवन जीने के कुछ सरल उपाय Oknews आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में तनाव हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गया है और हर कोई तनाव मुक्त जीवन जीने की उपाय ढूंढ रहा है आपकी जानकारी के लिए बता दूं मैं कि तनाव को हमने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है हम हमेशा एक समान जिंदगी जीते हैं बस हमारे मन के विचार अलग रहते हैं और जीवन जीने का संदर्भ अलग होता है अगर हम मन में सोच कुछ और रहे हैं और कर कुछ और रहे हैं तो यह तनाव को जन्म देता है और हम अपने कार्य को अच्छी तरीके से नहीं कर पाते और जो हमने सोच रखा है मन में उस में भी सफलता न मिलने के कारण तनाव बढ़ने लगता है । बात करें कुछ जीवन के उन पलों की जिस पल में इंसान किसी व्यक्ति से प्यार करता है उस दौरान भी वह उसी प्रकार की जिंदगी जीता है बस उसके मन के संदर्भ उस समय अलग होते हैं जिसकी वजह से वह अपने जीवन में संतुष्ट और खुश हो जाता है । अपने जीवन में हो रहे हर उतार-चढ़ाव को समझें अपने आप को समझे कि आप अपनी मन मुताबिक कार्य कर रहे हो हैं या नहीं आप कुछ ऐसा काम सुन सकते हैं जिससे मानव जगत का कुछ भला भी हो और आपके पास

घुटने का दर्द क्यों होता है - घुटने का दर्द कौन-कौन सी बीमारियों में ज्यादा होता है ! | घुटने के दर्द का सामाधान ...

  घुटने का दर्द क्यों होता है - दोस्तों यहां हम जानेंगे कि घुटने का दर्द क्यों होता है, दोस्तों या बड़ा प्रश्न है हमारा घुटना जो कि 3 हड्डियों से मिलकर बना होता है ऊपर वाली हड्डी जिसे थाई बोन बोलते हैं और नीचे वाली हड्डी जिसे लेग बोन बोलते हैं और आगे की तरफ हड्डी जिसे पटेला बोन बोलते हैं यह तीनों हड्डियां जहां मिलती हैं उसे ही घुटनों का जोड़ कहा जाता है इन तीनों के ऊपर एक चिकनी पॉलिश लेयर होती है जिससे की जब भी इन तीनों हड्डियों में मोमेंट हो यह एक दूसरे से रगड़ नहीं खाती हैं ! दोस्तों जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे किसी भी कारण से जैसे कि चोट के कारण, जेनेटिक कारणों या बस बुढ़ापे के कारण यह पॉलिश धीरे -धीरे से घिसने लगता है और हड्डी हड्डी से टकराकर दर्द देने लग जाता है घुटनों में दर्द होने का यह एक बहुत ही बड़ा कारण है कभी-कभी चोट लगने के कारण भी घुटने में दर्द पैदा हो जाता है या कभी-कभी घुटनों में किसी प्रकार का सूजन भी घुटनो के दर्द का कारण बन सकता है। घुटने का दर्द कौन-कौन सी बीमारियों में ज्यादा होता है ! पहला कारण है   बुढ़ापे में घुटने में किसी प्रकार का परिवर्तन होना य

बवासीर क्या है - बवासीर की आयुर्वेदिक दवा हैं...

  बवासीर क्या है -  दोस्तों मैं वैसे जो है एक बहुत ही सामान्य समस्या है यह पुरुषों तथा महिलाओं में लगभग बराबर मात्रा में होती है जो लैट्रिन का रास्ता होता है उसमें जब स्वेलिंग आ जाती है फिर कोई प्रॉब्लम होती है तभी हमें पता लगता है कि हमें पाइल्स या बवासीर की समस्या है बवासीर में खून का गुच्छा होता है उस खून के गुच्छे में खून इकट्ठा हो जाएगा तो वह बवासीर का रूप ले लेगा । लगभग 50% मरीज जिनको बवासीर की समस्या होती है उनको ब्रीडिंग की प्रॉब्लम भी होती है विज्ञान ऐसा मानती है कि 50 साल की उम्र के बाद 50% जो पापुलेशन है वह बवासीर की समस्याओं से ग्रसित हो जाते हैं यानी अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो जाती है तो आपको बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा माना जाता है कि पाइल्स प्रेग्नेंट महिलाओं को ज्यादा होता है ! पाइल्स क्या है -  वास्तव में जो हमारा लाइटिंग का रास्ता होता है उसमें खून की नसों के गुच्छे होते हैं यह कॉमन है या सभी को होते हैं लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे समय बढ़ते जाता है लैट्रिन के रास्ते में ज्यादा ताकत लगाने के कारण यह जो खून के नसों के गुच्छे हैं वह फूल जाते हैं जब यह

यूरिन इन्फेक्शन की आयुर्वेदिक दवा | यूटीआई से बचने के उपाय ...

  यूरिन इन्फेक्शन क्या है -  यूरिन इन्फेक्शन को यूटीआई भी कहते हैं जिसका मतलब होता है यूरिन ट्रैक इंफेक्शन। यानी कि जो हमारा यूरिन का मार्ग है जो कि किडनी से स्टार्ट होता है किडनी के बाद जो यूरिटल नलिया होती हैं और जो यूरिनरी ब्रेडल होता है और उसके बाद जो यूरिनरी वेसल होता है जिसके माध्यम से यूरिन बाहर निकलता है इस पूरे सिस्टम में जब कहीं पर भी इंफेक्शन हो जाता है तो उसको यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन बोलते हैं ! यूरिन इन्फेक्शन का कारण -  दोस्तों ! आइए हम यहां थोड़ा सा यूरिन इंफेक्शन के कारण के बारे में भी जान लेते हैं अगर हम आयुर्वेदिक भाषा में कहें तो आमतौर पर जब यूरो यूरिनरी ट्रैक में ज्यादा गर्मी हो जाएगी क्योंकि हम अक्षर आमतौर पर देखते हैं कि यूरिन इन्फेक्शन में जलन की समस्या होती है दर्द की समस्या होती है इसीलिए आयुर्वेद में कहा जाता है कि यदि आपका पित्त ज्यादा बढ़ेगा तो आपको यूटीआई की समस्या हो सकती है ! इसीलिए पित्त वर्धक भोजन जैसे मिर्च मसालेदार खाना तला हुआ तला हुआ बहुत ज्यादा तीखा, खट्टा या चाय, कॉफी, अल्कोहल स्मोकिंग यह सब यूरिन इन्फेक्शन के कारण होते हैं और कुछ लोग कम पानी पीते