Skip to main content

Oknews - Health | योग बनाता है आपको संपूर्ण और शक्तिशाली योग का मानव जीवन पर प्रभाव ,योग के माध्यम से अपने सभी चक्रों को जागृत करने के तरीके....

 योग के माध्यम से अपने सभी चक्रों को जागृत करने के तरीके

Oknews oknews oknews oknews oknews

योग व माध्यम है जिससे हम स्वयं से अवगत होते हैं तथा स्वयं की सारी शक्तियों का अनुभव तथा प्रयोजन सीखते हैं योग से मानव जीवन की सभी सीमित असीमित उपलब्धियों का ज्ञान होता है ! 

अध्यात्म जीवन बहुत ही सुंदर और शांतिपूर्ण जीवन होता है मनुष्य के शरीर में बहुत सारे ऐसे दिव्य शक्तियां हैं जिनका उसे एहसास भी नहीं है आज आपके शरीर में इन सभी शक्तियों के भागों का अध्ययन करेंगे

मनुष्य के शरीर में अलग-अलग ऊर्जा स्तर के आधार पर चक्र के रूप में ऊर्जा को दर्शाया गया है इंसान के शरीर में सात ऊर्जा चक्र होते हैं जिनमें से पहला है !

मूलाधार चक्र : मूलाधार चक्र क्या मनुष्य के मल द्वार और लिंग के बीचो बीच चार पत्ती वाला एक चक्र होता है इसे आधार चक्र के नाम से भी जाना जाता है और 99% लोगों की चेतना इसी आधार चक्र में रहकर अपना पूरा जीवन व्यतीत कर लेती है और वह इस चक्र में ही रह कर अपना जीवन यापन कर लेते हैं !

Oknews oknews oknews oknews oknews

दूसरे शब्दों में कहें तो जो लोगों के जीवन में भूख संभोग और नींद को अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं या अधिकतर इन के ही अधीन रहते हैं उनकी शरीर की सारी ऊर्जा इसी चक्र पर एकत्रित रहती है और वह हमेशा तनाव तथा अपूर्णता में ही रह जाते हैं अगर मनुष्य का मूलाधार चक्र जागृत हो जाए तो मनुष्य इन सभी भोग संभोग और निद्रा से मुक्त होकर एक आनंदमय जीवन व्यतीत करेगा आधार चक्र जागृत होने के बाद मनुष्य खुश रहता है तथा उसकी दिमागी क्षमता मजबूत होती है वीरता का अनुभव होता है और भी बहुत सारे बदलाव होते हैं !


मूलाधार चक्र को जागृत करने के लिए योग की अवस्था में बैठकर आपको इस मूलाधार चक्र पर ध्यान लगाना होगा आपका ध्यान जितना स्थिर होगा उतना ही आप इस चक्र को जागृत कर सकेंगे और इस चक्र को जागृत करने के लिए एक मंत्र का प्रयोग भी आप कर सकते हैं जो मंत्र है लं इस शब्द का ध्यान अपने मन के अंदर करें और अपने मूलाधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें आपका ध्यान जितना गहरा होगा आप चक्र को आसानी से जागृत कर सकेंगे और और इस चक्र के जाग्रत होने पर वीरता आनंद और मन में स्थिरता आती है जो सिद्धि प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है !

स्वाधिष्ठान चक्र : स्वाधिष्ठान चक्र आधार चक्र के ऊपर स्थित होता है इसमें 6 पंक्तियां होती हैं इसका मंत्र है वं हमारे जीवन में मनोरंजन बहुत जरूरी होता है लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं होती जो बिल्कुल सही है और यह मनोरंजन ही तो है जो मनुष्य की चेतना को बेहोशी की तरफ धकेलता है उदाहरण के लिए अगर आप कोई नाटक अथवा फिल्मों को देखते हैं तो आप थोड़े समय के लिए उस कैरेक्टर में खो जाते हैं और यह जानते हुए भी कि यह एक नाटक है उन सभी कैरेक्टर को निभा रहे इमोशंस को आप अपने से जोड़कर महसूस करते हैं !


 और आपको वह सारे इमोशंस असली में महसूस होता है स्वाधिष्ठान चक्र के जागृत हो जाने के बाद आपके अंदर की क्रूरता घमंड आलस अवज्ञा अविश्वास इन सभी दुर्गुणों का नाश होता है और आप सही और गलत को समझने की काबिलियत आ जाती है आपके जीवन में क्या सही है और क्या सही होना चाहिए वह सही चीजें आपको महसूस होने शुरू हो जाएंगे


 आप योग अवस्था में बैठकर वं मंत्र का ध्यान करते हुए अपने स्वाधिष्ठान चक्र पर ध्यान लगाएं इस तरह आप स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत कर पाएंगे ! 

मणिपुर चक्र : यह इंसान की नाभि के मूल में स्थित है जो कि 10 कमल पंखुड़ियों द्वारा युक्त होता है इसका मंत्र है रं इस चक्र के जागृत होने पर आपके अंदर आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर का विस्तार बढ़ जाता है और आपके किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नए रास्ते तथा एक सकारात्मक सोच आती है 


मणिपुर चक्र आपको सफलता तक पहुंचाने वाला चक्र है ।इस चक्र की सबसे विशेष बात यह है कि यह आपके किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक पोटेंशियल प्रदान करता है और एक आत्मविश्वास को जन्म देता है जिससे आप अपने लक्ष्य पर अकेले ही चल सकते हैं और उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं 

इस चक्र को जागृत करने के लिए योगा अवस्था में बैठकर रं मंत्र का ध्यान करें और अपने मणिपुर चक्र पर ध्यान केंद्रित करें !

अनाहत चक्र : यह चक्र आपके दिल और नाभि के बीच होता है इसका मंत्र यं होता है अनाहत चक्र में 12 पंखुड़ियां होती हैं इस चक्र के जाग्रत होने पर आपके चारों तरफ के एनवायरमेंट में आपकी सकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है और आप एक सकारात्मक एनवायरमेंट में रहते हो आप किसी भी व्यक्ति के पास जाने पर उस व्यक्ति पर आप का असर पड़ जाता है और वह आपसे काफी अट्रैक्ट भी हो जाता है !


आप आम लोगों की अपेक्षा से अधिक सोचने लगेंगे आपका दिमागी स्तर आम लोगों की तुलना में काफी बढ़ जाएगा हो सकता है लोग आपको पागल भी कहने लगे लेकिन आपकी सोच क्षमता काफी प्रबल हो जाएगी तथा आपके अंदर से हिंसा चिंता मोह अंधकार और अहंकार सब कुछ समाप्त हो जाएगा और आप सकारात्मक सोच के साथ जीवन में काफी दूर तक के फैसले सही रूप से ले सकेंगे यहां से आप महापुरुषों की श्रेणी मे आने लगोगे अनाहत चक्र को जागृत करने के लिए ध्यान की अवस्था यं मंत्र का ध्यान करना है !

विशुद्धि चक्र : यह आपके कंठ यानी गले में स्थित होता है जो कि 16 पंखुड़ियों वाला है इस चक्र का मंत्र है हं इस चक्र के जागृत हो जाने से आपके शब्दों में ठहराव तथा स्थिरता और मधुरता आ जाती है 


और आपके कहे हुए शब्दों पर यह प्रकृति भी प्रतिक्रिया देने लगती है ऐसा लगता है मानो यह प्रकृति आपके कहे हुए शब्दों का सम्मान करने लगी हो इस चक्र के जागृत होने पर आप अपनी भूख प्यास पर नियंत्रण रख सकते हैं तथा बाहरी नकारात्मक ऊर्जा जो आपकी तरफ आ रही हो उसको रोकने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है तथा मौसम के प्रभाव की वजह से जो बीमारियां होती हैं !


 बीमारियों से भी आप आसानी से बच सकते हैं और किसी भी एनवायरमेंट में रहने की क्षमता उत्पन्न जाती है इस चक्र को जागृत करने के लिए योग की अवस्था में बैठकर हं मंत्र का ध्यान करें 

आज्ञा चक्र : आज्ञा चक्र को हम तीसरी आंख third eye के नाम से जानते है जोकि दोनों आंखों के मध्य थोड़ा ऊपर की तरफ होता है इस चक्र का मंत्र ॐ होता है !

 आपके आज्ञा चक्र पर अपार शक्तियां तथा सिद्धियां निवास करती हैं इस चक्र के जागने के बाद आपके अंदर की सभी शक्तियां जागृत हो जाती हैं और आप एक सिद्ध पुरुष बन जाते हैं आप वह चीजें भी देख सकते हैं जो कोई नहीं देख सकता आप समय के हराया में जाकर आने वाली घटना तथा आने वाली संभावनाओं को देख सकते हैं और आप वह सभी चीजें पहले ही महसूस कर लेंगे जो चीजें होने वाली है 

आज्ञा चक्र जागृत हो जाने के बाद आप प्रकृति की उर्जा से जुड़ जाते हैं और फिर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपकी ऊर्जा कितनी ज्यादा बढ़ गई प्रकृति की उर्जा आपके जुड़ने के बाद आपके अंदर अद्भुत शक्तियों का एहसास होगा और आपके लिए कोई भी चीज असंभव नहीं लगेगा !

शास्त्रहार चक्र : दिमाग के मध्य भाग में यानि जहां आपकी चोटी का स्थान होता है वहां स्थित होता है इस चक्र का मंत्र वही है जो आज्ञा चक्र का है ॐ 


अगर कोई ध्यान करते हुए शास्त्रहार चक्र तक पहुंच गया तो उस व्यक्ति को सांसारिक किसी भी वस्तु से कोई भी मोह नहीं रह जाता वह स्वयं एक ऊर्जा बन जाती है जो हमेशा दूसरों के काम आती है

Oknews oknews oknews oknews oknews

इस चक्र के जाग्रत होने के बाद यह सभी चक्रों की ऊर्जा से मिल जाता है और सभी चक्र एक ऊर्जा में समाहित होकर मनुष्य को दूसरे आयाम में पहुंचा देते हैं जहां वह अत्यंत शक्तिशाली तथा एक सिद्ध पुरुष बन जाता है इन सभी चक्रों का जागरण करने वाला ही सिद्ध पुरुष कहलाता है और उसके लिए कोई भी कार्य या किसी भी लक्ष्य तक पहुंचना आसान हो जाता है और ऐसे पुरुष भगवान बुद्ध की श्रेणी में आ जाते हैं

जब यह सभी चक्र मनुष्य के जागृत हो जाते हैं तो वह शक्तिशाली मनुष्यों की श्रेणी में आ जाता है प्राचीन काल में ऐसे बहुत से योद्धा और महर्षि हुए हैं जिन्होंने योग के माध्यम से बहुत ही जटिल से जटिल काम में किए तथा मानव जीवन को एक सही मार्ग दिखलाएं !

Oknews oknews oknews oknews oknews

मानव शरीर के लिए बहुत सारी विचित्र बातें हैं और भी बहुत सारी आध्यात्मिक विज्ञान में रहस्य है मानव शरीर के लिए उनका विवरण प्रदान करेंगे धन्यवाद!

Comments

Popular posts from this blog

अपने जन्माष्टमी समारोह को थोड़ा खास बनाएं

 जन्माष्टमी का उत्सव भगवान कृष्ण को उनकी संपूर्णता में आमंत्रित करने के लिए समर्पित है। घटना की प्रशंसा करने के हर किसी के अपने विशेष तरीके होते हैं, वैसे भी, कुछ समारोह ऐसे होते हैं जो सामान्य होते हैं। निम्नलिखित कुछ ऐसे रिवाज़ हैं जिन्हें आप जश्न मनाने और उत्सव में कुछ और हिस्सा लेने के लिए कर सकते हैं।  दिन की छुट्टी पर उपवास शुरू करें -  उपवास जन्माष्टमी अवसर के सबसे मौलिक और सर्वव्यापी टुकड़ों में से एक है। आप आम तौर पर उत्सव की अधिक प्रशंसा करने के लिए घटना पर एक त्वरित नोटिस कर सकते हैं।  गुच्छा प्रतिबिंब धुनों और सेरेनेड्स में भाग लें -    गायन कीर्तन, या प्रतिबद्धता, महिमा, या प्रशंसा की धुन, जन्माष्टमी उत्सव का एक और महत्वपूर्ण घटक है। इस तथ्य के अलावा कि यह मूर्खता और प्रतिबिंब है, यह वास्तव में एक उत्सव के एक टुकड़े की तरह महसूस करने का कारण बनता है। इसी तरह, कीर्तन व्यक्तियों को एकजुट करते हैं।  अभयारण्य के लिए पुष्पांजलि और विभिन्न डिजाइनों की योजना बनाएं -    इस अवसर के सख्त और खुश घटकों में भाग लेने के लिए अपने घर या अपने पड़ोसी में अभयारण्य को सजाने में सहायता कर

Aate ke laddu banane ke tarike | आटे के लडडू के बारे में कुछ खास तरीके

Aate ke laddu banane ke tarike | आटे के लडडू के बारे में कुछ खास तरीके   आज हम आप को ठण्ड के मोसम में खाने वाले आटे के लडडू के बारे में कुछ खास बातें बताएंगे और उन को बनाने का तरीका भी आइए जानते हैं ।             इस ठण्ड के मौसम में बहुत तरह के लडडू बनाये जाते हैं जैसे चावल के आटे के लडडू और गैहू के आटे के लडडू और गौद के लडडू  और भी विभिन्न प्रकार के पकवान त्योहारों पर हमारे भारत में बनाए जाते हैं । लेकिन मैं आज आपके एक एसे लडडू बनाने के बारे में बताये गै जो आप ने कभी नहीं बनाये होगे यह लडडू ठण्ड के मोसम में हमारे लिए बहुत गुणकारी होते हैं कयोकि इन लडडू को बनाने में कुछ खास चीजें लगतीं है जो हमारे शरीर के लिए बहुत गुणकारी होती है कयोकि अकेले आटे के लडडू खाने से हमारे शरीर को कोई ताकत नही मिलती वो तो हम ठण्ड में खाने के लिए बना लेते हैं । आज में जो लडडू बनाने के बारे में बताऊँ गी वह हमारे लिए एक दवाई काम करते हैं ।             यह लडडू बनाने के लिए हम काले चननो का आटा लेगें यह आटा काले चननो को साबित पीस कल लेगें हमे बेसन नहीं लेना हमें साबुत काले चननो को घर पर पीस लेना है या फिर बाहर किस

सफेद दाग क्या होता है - सफेद दाग होने के कारण ,सफेद दाग का आयुर्वेदिक इलाज...

सफेद दाग क्या होता है - दोस्तों! सफेद दाग जन्म के बाद आने वाला स्किन प्रॉब्लम है जिसमें हमारी स्किन में जो कलर देने वाली पेशियां होती हैं वह मर जाती हैं हमारे स्कीम पर मिल्की वाइट या दूध जैसे सफेद दाग आने लगते हैं और हमारे स्क्रीन के लेयर में जो मेलानोसाइट्स नाम की जो पेशी होती है जो आपकी स्किन को कलर देती है यह मेलेलिन साइड जो रहती है वह मेलेलिन नाम की पिगमेंट बनाती है यह वेल्डिंग पिगमेंट की वजह से ही हमारे स्कूल में जो भी कलर है वह आता है इस मेलेलिन पिगमेंट की आपकी स्किन में होने वाले मात्रा के अनुसार है आपका स्क्रीन का जो कलर है वह निर्धारित होता है मेलेनिन पिगमेंट जब स्किन में ज्यादा होता है तब स्किन का कलर डार्क ब्राउन या सांवली दिखती है और अगर यह मेलेलिन पिगमेंट कम होता है तो आप की स्कीन गोरी या फिर दिखती है । सफेद दाग के शुरुआती लक्षण -  दोस्तों! इस रोग में रोगी को किसी तरह की दिक्कत तो नहीं होती है मगर सफेद दाग चेहरे और हाथ पैर पर दिखाई देते हैं जिसके कारण रोगी कुरुप नजर आता है इस कारण रोगी तनाव हीन भावना और डिप्रेशन में रहता है रोगी की स्क्रीन पर छोटे-छोटे सफेद धब्बे दिखाई देत

lampi virus से अपनी गाय को बचाने के लिए निम्न प्रकार की सावधानियां रखें आइए जानते हैं कैसे...

lampi virus   आज पूरे भारतवर्ष में हमारी गाय माता पर हावी है जिसकी वजह से हमारी गायों को अत्यधिक नुकसान हो रहा है और हमारे किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं लेकिन आज हम जानेंगे लंबी वायरस से अपने गायों को बचाने के लिए कुछ बेहतरीन सावधानियां जिनसे कुछ चांस कम हो जाएंगे lampi virus होने के आइए जानते हैं -- साफ सफाई का रखें ध्यान - अगर गायों को रखने वाला जगह साफ सुथरा नहीं है तो वहां से गायों को इन्फक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए कोशिश करेगी गायों को रखने वाले स्थान यानी कि तबेला साफ सुथरा रखें और अगर वहां पर कीचड़ हमेशा बना रहता है तो उस कीचड़ में मिट्टी का तेल अवश्य डालें या उसकी जड़ में मिट्टी के तेल का छिड़काव करें इससे कीचड़ में किसी भी तरह की बैक्टीरिया और वायरस नहीं बनेंगे ! खानपान हरियाली - समय के साथ हर जियो अपनी धीरे-धीरे पोलूशन बड़ी दुनिया में अपनी पाचन क्रिया को होता जा रहा है खेतों में अच्छी प्रकार हरियाली लाने के लिए यूरिया डाई कार्बोनेटेड क्या दिखा दो का उपयोग किया जा रहा है जो हमारे सेहत के लिए कहीं न कहीं अच्छा नहीं है यहां हम बात उन किसानों की कर रहे हैं जो कई लोग बा

एलर्जी खांसी की आयुर्वेदिक दवा

 एलर्जी क्या होता है -  दोस्तों सामान्य था जो एलर्जी होती है ऐसा होता है कि हमारे शरीर में कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस प्रवेश करते हैं रोजमर्रा में जिंदगी में जो यह वायरस और बैक्टीरिया होते हैं इनको हमारी बॉडी की इम्यून सिस्टम पहचानती है और इन के विरुद्ध आक्रमण करती है और किसके द्वारा वह वायरस और बैक्टीरिया को खत्म कर देती है जिससे कि शरीर पर विपरीत प्रभाव ना पड़े और शरीर को नुकसान नहीं पहुंचे लेकिन गड़बड़ वहां हो जाती है जहां शरीर की इम्यून सिस्टम कमजोर होती है ऐसी कुछ चीजें रहती हैं जो हमारे शरीर की दोस्त रहती हैं लेकिन वह दोस्त नहीं दुश्मन समझ लेती है जैसे कि हवा में उड़ के नाक के द्वारा अंदर जाने वाले एनिमल डेंजेल होते हैं कई अलग-अलग प्राणी होते हैं जैसे कि डॉग हुआ गाय हुई इस तरह से इनकी शरीर से बारीक- बारीक रेशे निकलते हैं जो सूखकर नाक के द्वारा अंदर जाते हैं सामान्यतः तो यह सभी को जाते हैं लेकिन कुछ लोगों में यह शरीर की जो इम्यून सिस्टम है उससे रिएक्ट करना शुरू कर देती है और वह रिएक्शन होता है उसी हम एलर्जी कहते हैं और सामान्यतः यह जो एलर्जी है वह 3- 4 तरह की एलर्जी होती है

तनाव से छुटकारा कैसे प्राप्त करें | तनाव मुक्त जीवन जीने के कुछ सरल उपाय

 तनाव से छुटकारा कैसे प्राप्त करें | तनाव मुक्त जीवन जीने के कुछ सरल उपाय Oknews आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में तनाव हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गया है और हर कोई तनाव मुक्त जीवन जीने की उपाय ढूंढ रहा है आपकी जानकारी के लिए बता दूं मैं कि तनाव को हमने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है हम हमेशा एक समान जिंदगी जीते हैं बस हमारे मन के विचार अलग रहते हैं और जीवन जीने का संदर्भ अलग होता है अगर हम मन में सोच कुछ और रहे हैं और कर कुछ और रहे हैं तो यह तनाव को जन्म देता है और हम अपने कार्य को अच्छी तरीके से नहीं कर पाते और जो हमने सोच रखा है मन में उस में भी सफलता न मिलने के कारण तनाव बढ़ने लगता है । बात करें कुछ जीवन के उन पलों की जिस पल में इंसान किसी व्यक्ति से प्यार करता है उस दौरान भी वह उसी प्रकार की जिंदगी जीता है बस उसके मन के संदर्भ उस समय अलग होते हैं जिसकी वजह से वह अपने जीवन में संतुष्ट और खुश हो जाता है । अपने जीवन में हो रहे हर उतार-चढ़ाव को समझें अपने आप को समझे कि आप अपनी मन मुताबिक कार्य कर रहे हो हैं या नहीं आप कुछ ऐसा काम सुन सकते हैं जिससे मानव जगत का कुछ भला भी हो और आपके पास

घुटने का दर्द क्यों होता है - घुटने का दर्द कौन-कौन सी बीमारियों में ज्यादा होता है ! | घुटने के दर्द का सामाधान ...

  घुटने का दर्द क्यों होता है - दोस्तों यहां हम जानेंगे कि घुटने का दर्द क्यों होता है, दोस्तों या बड़ा प्रश्न है हमारा घुटना जो कि 3 हड्डियों से मिलकर बना होता है ऊपर वाली हड्डी जिसे थाई बोन बोलते हैं और नीचे वाली हड्डी जिसे लेग बोन बोलते हैं और आगे की तरफ हड्डी जिसे पटेला बोन बोलते हैं यह तीनों हड्डियां जहां मिलती हैं उसे ही घुटनों का जोड़ कहा जाता है इन तीनों के ऊपर एक चिकनी पॉलिश लेयर होती है जिससे की जब भी इन तीनों हड्डियों में मोमेंट हो यह एक दूसरे से रगड़ नहीं खाती हैं ! दोस्तों जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे किसी भी कारण से जैसे कि चोट के कारण, जेनेटिक कारणों या बस बुढ़ापे के कारण यह पॉलिश धीरे -धीरे से घिसने लगता है और हड्डी हड्डी से टकराकर दर्द देने लग जाता है घुटनों में दर्द होने का यह एक बहुत ही बड़ा कारण है कभी-कभी चोट लगने के कारण भी घुटने में दर्द पैदा हो जाता है या कभी-कभी घुटनों में किसी प्रकार का सूजन भी घुटनो के दर्द का कारण बन सकता है। घुटने का दर्द कौन-कौन सी बीमारियों में ज्यादा होता है ! पहला कारण है   बुढ़ापे में घुटने में किसी प्रकार का परिवर्तन होना य

बवासीर क्या है - बवासीर की आयुर्वेदिक दवा हैं...

  बवासीर क्या है -  दोस्तों मैं वैसे जो है एक बहुत ही सामान्य समस्या है यह पुरुषों तथा महिलाओं में लगभग बराबर मात्रा में होती है जो लैट्रिन का रास्ता होता है उसमें जब स्वेलिंग आ जाती है फिर कोई प्रॉब्लम होती है तभी हमें पता लगता है कि हमें पाइल्स या बवासीर की समस्या है बवासीर में खून का गुच्छा होता है उस खून के गुच्छे में खून इकट्ठा हो जाएगा तो वह बवासीर का रूप ले लेगा । लगभग 50% मरीज जिनको बवासीर की समस्या होती है उनको ब्रीडिंग की प्रॉब्लम भी होती है विज्ञान ऐसा मानती है कि 50 साल की उम्र के बाद 50% जो पापुलेशन है वह बवासीर की समस्याओं से ग्रसित हो जाते हैं यानी अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो जाती है तो आपको बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा माना जाता है कि पाइल्स प्रेग्नेंट महिलाओं को ज्यादा होता है ! पाइल्स क्या है -  वास्तव में जो हमारा लाइटिंग का रास्ता होता है उसमें खून की नसों के गुच्छे होते हैं यह कॉमन है या सभी को होते हैं लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे समय बढ़ते जाता है लैट्रिन के रास्ते में ज्यादा ताकत लगाने के कारण यह जो खून के नसों के गुच्छे हैं वह फूल जाते हैं जब यह

यूरिन इन्फेक्शन की आयुर्वेदिक दवा | यूटीआई से बचने के उपाय ...

  यूरिन इन्फेक्शन क्या है -  यूरिन इन्फेक्शन को यूटीआई भी कहते हैं जिसका मतलब होता है यूरिन ट्रैक इंफेक्शन। यानी कि जो हमारा यूरिन का मार्ग है जो कि किडनी से स्टार्ट होता है किडनी के बाद जो यूरिटल नलिया होती हैं और जो यूरिनरी ब्रेडल होता है और उसके बाद जो यूरिनरी वेसल होता है जिसके माध्यम से यूरिन बाहर निकलता है इस पूरे सिस्टम में जब कहीं पर भी इंफेक्शन हो जाता है तो उसको यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन बोलते हैं ! यूरिन इन्फेक्शन का कारण -  दोस्तों ! आइए हम यहां थोड़ा सा यूरिन इंफेक्शन के कारण के बारे में भी जान लेते हैं अगर हम आयुर्वेदिक भाषा में कहें तो आमतौर पर जब यूरो यूरिनरी ट्रैक में ज्यादा गर्मी हो जाएगी क्योंकि हम अक्षर आमतौर पर देखते हैं कि यूरिन इन्फेक्शन में जलन की समस्या होती है दर्द की समस्या होती है इसीलिए आयुर्वेद में कहा जाता है कि यदि आपका पित्त ज्यादा बढ़ेगा तो आपको यूटीआई की समस्या हो सकती है ! इसीलिए पित्त वर्धक भोजन जैसे मिर्च मसालेदार खाना तला हुआ तला हुआ बहुत ज्यादा तीखा, खट्टा या चाय, कॉफी, अल्कोहल स्मोकिंग यह सब यूरिन इन्फेक्शन के कारण होते हैं और कुछ लोग कम पानी पीते