दशहरा , हिन्दू धर्म का सबसे पुराना पर्व है आइए जानते हैं दशहरे वाले दिन माता दुर्गा की किस प्रकार पूजा करते हैं और इस तरह इस उत्सव को मनाते हैं...?

                     दशहरा

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हमारा देश एक  धार्मिक देश है। यहाँ पर अनेक धर्मों के लोग रहते हैं।  यहाँ पर हिन्दू धर्म के बहुत सारे तौहार मनाये जाते हैं।  जिन में से दशहरा एक पवित्र तौहार है।  दशहरा दिन को विजय दशमी भी कहा जाता है। 



दशहरा पर्व अशविन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है दशहरा तौहार बहुत महत्वपूर्ण तौहार है।  दशहरा पर्व भारत के अलग अलग हिसो  में अलग अलग तरिके से मनाया जाता है। यह दिपावली से बीस दिन पहले मनाया जाता है। दशहरा तौहार सत्य पर विजय  का प्रतीक है।  कहा जाता है कि इस दिन राम चंद जी ने लंका पर विजय प्राप्त की थी। इस दिन माँ दुर्गा ने अहंकारी महिषासुर का वध किया था। इसी कारण नवरात्रि का तौहार इनहि दिनों में मनाया जाता है।  नौ दिन तक रामलीला होती है।  और दसवीं के दिन दुशहरा मनाया जाता है।  इस दिन रावण,   मेघनाथ, और कुमभकर के पुतलों को जलाय जाता है।  ओर श्रीराम की पुजा की जाती है।  हिमाचल में कुलू और मैसूर का दुशहरा मनाया जाता है।  यह तौहार बुराई  पर अच्छाई का प्र तीक है।  इस दिन सभी घरों में यह तौहार  मनाया जाता है।  इसलिए सभी को हमेशा सत्य के रास्ते पर चलना चाहिए।


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दशहरा के दिन माँ दुर्गा को किसी तालाब में विसजर्न किया जाता है।  इस दिन सभी लोग अपने घरों में माँ दुर्गा की अनुमति ओर श्रीराम की पुजा करते हैं।  रामलीला के मैदान में श्रीराम और रावण की सैना के बीच युद्ध दिखाया जाता है। सभी लोग शाम को रामलीला मैदान में रामलीला देखने जाते हैं।  इस दिन सभी लोग अपने घरों में मिठाई बनाते हैं। 


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दुशहरा के दिन सभी लोग मेला देखने जाते हैं।  इस दिन शाम को बाजार में जलूस निकाला जाता है।  यह तौहार हमें सत्य के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।

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