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मिरगी - मिरगी आने पर कुछ घरेलू उपाय तथा आयुर्वेद में समाधान

 मिरगी - मिरगी आने पर कुछ घरेलू उपाय तथा आयुर्वेद में समाधान...

  1. स्नायु संबंधी रोगों में मिर्गी को सबसे भयानक रूप माना जाता है। इसका दौरा कभी भी और कहीं भी पड़ सकता है। इसके रोगी को आग,कुए, तालाब, नदी, पुल, रेलवे लाईन, बीच सड़क पर कभी अकेले नहीं जाने देना चाहिए तथा किसी भी किस्म की गाड़ी भी नहीं चलाने देना चाहिए। इस रोग में निम्न उपाय करना अधिक लाभदायक होता है !
  2.  तीन औंस प्याज का रस सुबह के समय थोड़ा-सा पानी मिलाकर पीने से मिरगी का दौरा पड़ना बंद हो जाता है। सवा महीने तक प्याज का रस अवश्य लेना चाहिए। यदि रोगी को दौरा पड़ा हो, तो प्याज का रस नथूनों पर लगा देने से वो होश में आ जाता है।
  3. लहसुन को कूटकर सुँघाने से मिरगी के रोगी को होश आ जाता है। यदि रोजाना लहसुन की आठ-दस कलियाँ दूध में उबालकर, वह दूध रोगी को पिलाया जाए, तो कुछ सप्ताह में ही मिरगी का रोग दूर हो जाता है है।
  4. करौंदे के पच्चीस-तीस पत्ते छाछ में पीसकर दो सप्ताह नित्य सेवन करने से मिरगी का दौरा पड़ना बंद हो जाता है। मिरगी के रोगी को एक पाव दूध में चौथाई कप मेंहदी का रस मिलाकर पिलाने से बहुत लाभ होता है।
  5. राई को पीसकर सुंघाने से मिरगी के रोगी की बेहोशी टूट जाती है। 
  6. मुट्ठी भर तुलसी की पत्तियों में चार-छः कपूर की टिकिया मिलाकर रोगी को सुँघाएँ, लाभ होगा।


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