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Constipation - कब्ज की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज | पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या को दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय | इसबगोल का सेवन कैसे करें...

कब्ज की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज ने तरीकों द्वारा किया जा सकता है । कब्ज की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज | पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या को दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय...

  • प्रातः उठते ही कुल्ला या दंत मंजन करके एक गिलास ठंडा पानी पीकर इसके बाद एक गिलास गुनगुने गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर पी ले फिर सोच के लिए जाएं ।
  • सोते समय ठंडे पानी या दूध के साथ इस बगोल एक या दो चम्मच मात्रा में प्रतिदिन सेवन करें इससे सुबह सोच खुलकर होता है ।
  • सुबह का भोजन करने के बाद एक छोटी हरड़ के बारे टुकड़े कर के मुंह में रख ले और लगभग 1 घंटे तक चूसते रहें इससे कब्ज की समस्या खत्म हो जाएगी ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब शरीर  अत्यंत थका हुआ या अत्यंत दुर्बल भूखा प्यासा अल्प पित्त बढ़ा हुआ या पित्त कुपित अवस्था में हो तब हरड़ का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • रात को सोते वक्त एक कप दूध में एक अंजीर और बीज निकली हुई दो बड़ी मुनक्का पकाकर खूब चबा चबाकर खा ले और फिर ऊपर से वह दूध भी पी ले यह प्रयोग पुरानी से पुरानी कब्ज को दूर करने में सहायक है ।

कब्ज की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज | पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या को दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय...

कब्ज की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज | पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या को दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय.

कब्ज में इसबगोल कैसे ले ?

हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति मूलतः प्राकृतिक पदार्थों और जड़ी-बूटियों पर आधारित थी जो पूर्णता निरापद थे परंतु आप  शीघ्र लाभ पाने के लोग में हम अनेक प्राकृतिक औषधियों को भुला बैठे हैं इसबगोल जैसी प्राकृतिक चमत्कारी औषधि भी उन्हीं में से एक है यह पौधे का बीज होती है बीजों के ऊपर सफेद होती है इसके बीज घोड़े के कान की शक्ल के होते हैं इसलिए इसे संस्कृत में अकारण तथा फारसी में ऐश्वर्या ने घोड़ा घो रानी का अर्थात इसबगोल कहते हैं एक औषधि के रूप में प्रयोग की जाने वाली इसबगोल की भूसी अतिसार अतिसार पाचन तंत्र के विकार खूनी बवासीर स्वप्नदोष मोटापा डायबिटीज तथा कब्ज दूर करने वाली श्रेष्ठ निरापद और गुणकारी दवा का काम करती है इसबगोल की भूसी में काफी मात्रा में पाया जाता है डालने से फूल जाता है और एक जेल का निर्माण करता है एवं आंतों के अंदर मौजूद बैक्टीरिया और दूसरे नुकसान पहुंचाने वाले जीवाणु की सफाई करता है साथ ही आता है एवं पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है इसके उपचार में इसबगोल बहुत ही फायदेमंद है इसमें फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है जो आंतो की गतिशीलता को बढ़ाती है एवं मल को मुलायम कर आसानी से बाहर निकालकर कब्ज दूर करने में मदद करती है इसका सेवन करने से कब्ज ठीक होने लगता है आयुर्वेद के अनुसार एवं सीने में जलन के लिए भी बहुत ही गुणकारी है इसबगोल का सेवन बीमारी एवं उम्र के हिसाब से कितनी मात्रा में करना चाहिए यह जानना आवश्यक है ताकि इसका पूरा लाभ मिल सके सामान्यतः ईसबगोल की भूसी को पानी के साथ मिलाकर सेवन करना फायदेमंद रहता है पानी के साथ मिलते ही एक दिल का निर्माण करता है रात को सोते समय लगभग 240 मिलीलीटर गुनगुने पानी के साथ सेवन करें या मल को मुलायम करने में मदद करेगा जिससे कब्ज की समस्या से निजात मिलेगी पेट में मरोड़ होने पर एक चम्मच इसबगोल की भूसी पानी में भिगोकर प्रति दिन में दो बार ले इसबगोल को पानी में मिलाकर लेने से बवासीर के रोगियों को काफी राहत मिलती है खाना खाने के बाद ठंडे पानी मलाकर इसबगोल का सेवन करने से पेट के काफी समस्याओं में राहत मिलती है ।


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