Ganesh Chaturthi | Celebration, Significance, & Information गणेश चतुर्थी हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार..

Ganesh Chaturthi | Celebration, Significance, & Information गणेश चतुर्थी हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार..

यह त्यौहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है परंतु महाराष्ट्र में से बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था गणेश चतुर्थी के अवसर पर हिंदू भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है कई विशेष जगहों पर भगवान गणेश जी की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाती है इस प्रतिमा को 9 दिन तक पूजा जाता है और दसवे दिन बड़ी संख्या में आसपास के लोग इस प्रतिमा का दर्शन करने पहुंचते हैं और बहुत ही धूमधाम से गाने बाजे के साथ किसी पवित्र नदी या तालाब में इस प्रतिमा को विसर्जित कर देते हैं !

 गणेश उत्सव क्यों मनाया जाता है, 


सृष्टि के आरंभ में जब यह प्रश्न उठा कि प्रथम पूज्य किसे माना जाए तब देवता इस समस्या को लेकर भगवान शिव के पास पहुंचे भगवान शिव ने यह समस्या सुनने के बाद यह कहा कि जो भी इस संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा सबसे पहले कर लेगा उससे ही प्रथम पूज्य माना जाएगा इस प्रकार सभी देवता अपने अपने वाहन पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े क्योंकि गणेश भगवान का वाहन चूहा है और उनका सदैव स्थूल है तो भगवान गणेश कैसे परिक्रमा कर पाते तब भगवान गणेश ने अपनी सूझबूझ बुद्धिमानी और चतुराई से अपने पिता शिव और माता पार्वती की तीन बार परिक्रमा की और हाथ जोड़कर खड़े हो गए जब भगवान शिव ने कहा कि तुम से बड़ा बुद्धिमानी संसार में और कोई नहीं है माता और पिता की तीन परिक्रमा करके तुमने संसार के तीनों लोक की की परिक्रमा पूर्ण कर ली है जो कि पृथ्वी की परिक्रमा से भी बड़ा है और इसका पुण्य तुम्हें मिल गया यह संसार किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले तुम्हारी पूजन करेगा जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा तभी से भगवान अग्र पूज्य हो गए और उनकी पूजा सभी देवी और देवताओं से पहले की जाने लगी भगवान श्री गणेश की पूजा के बाद ही दूसरे देवी देवताओं की पूजा की जाती है इसलिए गणेश चतुर्थी में भगवान गणेश की पूजा की जाती है गणेश चतुर्थी को मनाने वाले सभी श्रद्धालुओं इस दिन स्थापित की गई भगवान गणेश की प्रतिमा को दसवे दिन अनंत चतुर्थी के दिन विसर्जित कर देते हैं इस प्रकार गणेश उत्सव का समापन किया जाता है !

  शिव पुराण में भाद्रपद मार्च में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मंगल मूर्ति गणेश की अवतरित तिथि बताया गया है जबकि गणेश पुराण के मत से गणेश अवतार भाद्रपद शुक्ला चतुर्थी को हुआ था गण और पति से मिलकर बना हुआ गणपति संस्कृत अनुसार गण अर्थात पवित्रता पति अर्थात स्वामी गणपति अथर्व पवित्रको के स्वामी !

   गणेश उत्सव 10 दिनों तक क्यों मनाते हैं, !

   दोस्तों धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब वेदव्यास जी ने महाभारत की कथा गणेश जी को 10 दिनों तक सुनाई थी तब तब उन्होंने अपने नेत्र बंद कर लिए थे और जब 10 दिन बाद आंखें खुली तो पाएं की गणेश जी का तापमान बहुत अधिक हो गया था फिर उसी समय वेदव्यास जी निकट स्थित कुंड में गणेश जी को स्नान कराया था जिससे उनके शरीर का तापमान कम हो गया था इसलिए गणपति स्थापना के 10 दिन तक गणेश जी की प्रतिमा की पूजा की जाती है और फिर उनकी प्रतिमा को श्री पवित्र नदी या तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है गणेश विसर्जन इस बात का भी प्रतीक है कि यह शरीर मिट्टी का बना है और अंत में मिट्टी में ही मिल जाता है !

   गणेश उत्सव कब से मनाया जाता है- 

वैसे तो यह उत्सव कई वर्षों से मनाया जा रहा है सन 1893 से पूर्व यह केवल घर तक ही सीमित था उस समय सामूहिक उत्सव नहीं मनाया जाता था और ना ही बड़े पैमाने पर पंडालों में इस तरह से प्रतिमा स्थापित की जाती थी 1893 में बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजों के विरुद्ध भारतीय को एकजुट करने के लिए बड़े पैमाने पर इस उत्सव का आयोजन किया जिसमें बड़े पैमाने पर बढ़-चढ़कर लोगों ने हिस्सा लिया इस प्रकार पूरे राष्ट्र में गणेश चतुर्थी मनाई जाने लगी बाल गंगाधर में 1893 में पहली बार यह आयोजन महाराष्ट्र में किया था इसलिए यह पर्व महाराष्ट्र में सबसे अधिक धूमधाम से मनाया जाता है बाल गंगाधर तिलक उस समय स्वराज्य के लिए संघर्ष कर रहे थे और उन्हें ऐसा मंच चाहिए था जिसके माध्यम से उनकी आवाज अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और तब उन्होंने गणपति उत्सव का चयन किया और उसे एक भव्य रुप दिया जिसकी छवि आज तक पूरे महाराष्ट्र में देखने को मिलती है !

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