what is the jika virus..?| जीका वायरस क्या है | जीका वायरस के लक्षण तथा रोकथाम

 what is the jika virus..?| जीका वायरस क्या है | जीका वायरस के लक्षण तथा रोकथाम


दोस्तों आज हम एक बहुत ही अजीब वायरस के बारे में चर्चा करेंगे जो हमारे भविष्य के लिए बहुत ही महंगा पड़ सकता है आइए जानते हैं विस्तार से...

हाल ही मे इस वायरस के लक्षण और कार्य को पर काफी शोध हो रहे हैं इस वायरस का नाम है जिका वायरस, आप चीन का वायरस या किसी भी वायरस के बारे में जरूर अवगत होंगे वायरस अपनी संख्या बहुत तेजी से बढ़ाते हैं जिका वायरस से जुड़ी कुछ और भी जानकारियां आइए जानते हैं

जीका वायरस क्या है? जानिए इसके लक्षण और कारण

 वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन  के अनुसार जीका वायरस संक्रमण की पुष्टि करने के लिए इंसान का रक्त शरीर के अन्य तरल पदार्थ वीर्य तथा मूत्र के द्वारा इस वायरस का पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति संक्रमित  है या नहीं 

जीका वायरस एक मच्छरों के द्वारा उत्पन्न फ्लेविवायरस है जो एडीज मच्छरों के द्वारा फैलता है एडीज मच्छर वह मच्छर होते हैं जो दिन के समय अत्यधिक सक्रिय होते हैं या यूं कहे तो दिन के समय काटते हैं जीका वायरस को सर्वप्रथम युगांडा के बंदरों में 1947 में पहचान की गई थी । इसे बाद में 1952 में युगांडा और संयुक्त गणराज्य तंजानिया में मनुष्यों में पहचाना गया। जीका वायरस के संक्रमण की रोकथाम या उपचार के लिए अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है। जिका वायरस वायरस को कई तरह से प्रयोगशाला में प्रयोग के दौरान जिका वायरस का उपचार बनाया जा रहा है !

 बताया जा रहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, जीका वायरस जन्म दोषों से भी जुड़ा हुआ है। जिसकी वजह से गर्भधारण की हुई महिला के दौरान इसका संक्रमण माइक्रोसेफली नामक बीमारी का संकेत है। जो अपूर्ण मस्तिष्क बीमारी पैदा करता है इसे हम दूसरे शब्दों में जन्म दोष के रूप में इसे कह सकते हैं !

 जीका वायरस के संक्रमण का संदेह जीका वायरस संचरण या एडीज मच्छर वैक्टर वाले क्षेत्रों में रहने वाले या आने वाले व्यक्तियों के लक्षणों के आधार पर किया जा सकता है। WHO के अनुसार जीका वायरस संक्रमण के निदान की पुष्टि रक्त या शरीर के अन्य तरल पदार्थ, जैसे मूत्र या वीर्य के प्रयोगशाला परीक्षणों से ही की जा सकती है।

 जीका वायरस क्या है?

कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां एडीज मच्छरों के जींस एडीज इजिप्ट में बदल जाते हैं और वह यह एडीज इजिप्ट से संक्रमित मच्छर जब इंसान को काटते हैं  जिका वायरस होने का खतर खतरा बढ़ जाता है यह आमतौर पर देखा गया है कि यह मच्छर दिन के समय ही काटते हैं सुबह और शाम की बेला में ज्यादा एक्टिव रहते हैं !

 यह वही मच्छर है जो डेंगू, चिकनगुनिया और पीला बुखार फैलाता है। लेकिन अब यहां मच्छर बहुत ही ताकतवर हो गए हैं और इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता अनियमितता और अशुद्ध भोजन की वजह से कम होती जा रही है !

महिला के गर्भवती होने पर मां के अंडाशय में जहां बच्चा पल रहा है महिला से उस बच्चे तक भी फैल जाता है !

 जीका वायरस गर्भावस्था के दौरान, यौन संपर्क, रक्त और रक्त उत्पादों के आधान और अंग प्रत्यारोपण के माध्यम से मां से भ्रूण में भी फैलता है। 1952 में युगांडा के और कुछ संयुक्त गणराज्य तंजानिया में जिका वायरस वहा के मनुष्य में पाया गया !

 जीका वायरस रोग का प्रकोप अफ्रीका, अमेरिका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में दर्ज किया गया है। आमतौर पर हल्की बीमारी के साथ 1960 से 1980 के दशक तक, अफ्रीका और एशिया में मानव संक्रमण के दुर्लभ छिटपुट मामले पाए गए !

 जीका वायरस रोग के लक्षण 

इसमें बुखार, दाने, नेत्रश्लेष्मलाशोथ, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, अस्वस्थता या सिरदर्द शामिल हैं। लक्षण आमतौर पर 2-7 दिनों तक रहते हैं। जीका वायरस संक्रमण वाले अधिकांश लोगों में लक्षण विकसित नहीं होते हैं।

जन्मजात जीका सिंड्रोम :

 जीका वायरस से संक्रमण गर्भावस्था की अन्य जटिलताओं से भी जुड़ा है, जिसमें समय से पहले जन्म और गर्भपात शामिल हैं। गर्भावस्था के दौरान, यह शिशुओं को माइक्रोसेफली और और भी जन्मजात बीमारियों से ग्रसित कर सकता है जिसको जन्मजात जिका सिंड्रोम कहते हैं !

जिका वायरस लोगों में काफी हद तक खेल रहा है और लोगों के पास सावधानी के अलावा और कोई विकल्प नहीं है जल्द ही हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन इस वायरस का एंटी डोर लेकर आ सकती हैं तब तक आप सावधानी बरतें और अपना ध्यान रखें 

धन्यवाद ।

Post a Comment

1 Comments