Oknews - News | करवा चौथ , भारतीय सभ्यता में एक ऐसा त्यौहार जहां स्त्री अपने पति की दीर्घायु के लिए करती है व्रत तथा पूजा

करवा चौथ 

आज का हमारा बिषय करवा चौथ है। कयोकि हमारे देश में कई तयोहार आते हैं। जो इस अकतूबर और नवम्बर के महीने में ही मनाये जाते हैं। इन में से करवा चौथ भी एक खास तयोहार है। यह तौहार औरतों का तयोहार होता है। वेसे तो औरतों के लिए सारे व्रत बहुत ही खास हौते हैं। लेकिन यह तौहार औरतों के लिए कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
  इस  व्रतको कोई भी ऊम्र की औरतों रख सकती हैं।  इस व्रत को कुवांरी लड़की भी रख सकती हैं।  यह व्रत सुहागन औरतों के लिए होता है।  वह अपने पति की लम्बी उम्र के लिए यह व्रत रखती है।  यह व्रत ओरतो के सुहाग का  प्रतीक है। किसी भी लड़की की शादी के बाद कोई भी तयोहार बहुत महत्वपूर्ण होता है।  करवा चौथ का व्रत भी पति के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 



 यह व्रत  क्रांतिक  मास की चौथ की तिथि को मनाया जाता है।  शादी के बाद सभी नव विवाहित औरतों को यह व्रत आपने मायके में मनाया जाता है।  यह  व्रत वह अपने पति की लम्बी उम्र के लिए रहती हैं।



 औरतें  इस दिन  सुबह जल्दी उठ कर अपने पति के लिए  खाली पेट यह व्रत रखती हैं।  सभी औरतों को इस दिन कुछ भी नहीं खाना होता।  इस दिन सभी औरतों अपने घरों में किसी भी तिखी चिज    से कोई काम नहीं करती  जैसे कैंची,,  सुई  आदि इसे अशुभ माना जाता है।  इस व्रत के दिन सासु अपनी बहु  को उपहार के रूप में सरगी देती है।  बहु  इस  सरगी के समान से ही अपना व्रत रखती है।  यह व्रत बडों का आशीर्वाद लेकर रखना चाहिए।  इस से हमारे ससुराल में सम्रधी बनी रहती है।  इस दिन सभी औरतों लाल 🔴 रंग के कपड़े पहनकर यह व्रत रखती हैं। कयोकि लाल रंग सुहाग का प्रतीक होता है।  



इस दिन औरतों को दुपहर के समय चौथ माता की कथा करती हैं।  सभी औरतों मिल कर चौथ माता की पुजा करती हैं।  फिर शाम को चंदा को जल अप्रन करने के बाद अपने पति के हाथ से पानी पी कर अपन व्रत खोलती हैं।  इस  तरह वह अपने करवा चौथ के व्रत को पुरा करती हैं।



Previous Post Next Post